AI के कारण भारतीय सॉफ्टवेयर स्टार्टअप्स के सामने रणनीति बदलने की चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS) कंपनियों के काम को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहा है। पहले जिन सॉफ्टवेयर को बनाने में सालों लग जाते थे, अब बेहतर AI टूल्स की मदद से कुछ ही महीनों में तैयार हो रहे हैं।
इस बड़े बदलाव के कारण स्टार्टअप्स को हर चीज पर नए सिरे से सोचनी पड़ रही है। फिर चाहे नए फीचर्स बनाने हों या ग्राहकों से शुल्क लेना हो, कंपनियों को पुराने सीट-बेस्ड प्राइसिंग मॉडल से निकलकर उपयोगानुसार भुगतान करो जैसे नए मॉडल्स अपनाने पड़ रहे हैं।
निवेशकों का स्टार्टअप्स पर दबाव
निवेशक स्टार्टअप्स के संस्थापकों पर जल्द बदलाव करने का जोर दे रहे हैं, ताकि वे पीछे न छूटें। शुरुआती दौर की टीमें अपने प्लान लगातार बदल रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि, अब उनके लिए फंड जुटाना मुश्किल हो गया है और लंबे समय तक टिके रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कंपनियां AI से आ रहे बाजार के बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में जी-जान से लगी हैं, ताकि वे अपनी जगह बनाए रख सकें। आइडियास्प्रिंग कैपिटल के नागानंद दोरस्वामी कहते हैं, "अगर, जो चीज आपने 2 साल में बनाई थी, वो अब 3 महीने में दोबारा बन सकती है तो आपकी हालत खराब है।" ऐसे में स्टार्टअप्स को बिल्कुल नई रणनीतियों की जरूरत है।
स्टेलरिस वेंचर पार्टनर्स के आलोक गोयल का मानना है कि स्टार्टअप्स के पास ये एक बेहतरीन मौका है कि वे अपने मौजूदा कामों में AI का रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करें।