बचपन का संघर्ष माइटोकॉन्ड्रिया को बना देता है ज्यादा सक्रिय, नए शोध में हुआ खुलासा
बचपन के मुश्किल अनुभव हमारे शरीर की कोशिकाओं के ऊर्जा बनाने के तरीके को बदल सकते हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
शोध कहता है कि जिन लोगों ने बचपन में कठिनाइयों का सामना किया, उनकी कोशिकाओं में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिकाओं का पावरहाउस ) सामान्य से ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इनकी यह ज्यादा सक्रियता आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
खतरा और कमी डालते हैं अलग-अलग असर
शोधकर्ताओं ने 140 से ज्यादा वयस्कों पर यह अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि 'खतरा' कोशिकाओं से कम ऊर्जा बनवाता है, लेकिन ऐसी कोशिकाएं तनाव का सामना करने के लिए बेहतर तैयार हो जाती हैं।
दूसरी तरफ, 'कमी' (बुनियादी जरूरतों या भावनात्मक सहारे की कमी) से ऊर्जा का उत्पादन सही ढंग से नहीं हो पाता और कोशिकाओं में भी समस्याएं पैदा होने लगती हैं।
इस अध्ययन की मुख्य लेखिका शिलोह क्लीवलैंड को उम्मीद है कि इन बदलावों को समझकर हम शुरुआती दौर में ही लोगों की मदद कर सकेंगे, ताकि वे लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकें।