AI और आम गैजेट्स दिव्यांगों का जीवन बना रहे आसान
'इंसिडेंटल एक्सेसिबिलिटी: मुख्यधारा की तकनीक भारत में एक्सेसिबिलिटी को कैसे बढ़ा रही है' रिपोर्ट बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉयस-क्लोनिंग और स्मार्ट ग्लासेज भारत में दिव्यांगजनों के लिए पहुंच को आसान बना रहे हैं। खास बात यह है कि इन गैजेट्स को मूल रूप से इस उद्देश्य से नहीं बनाया गया था।
दिल्ली में इस रिपोर्ट के लॉन्च इवेंट में लेखक अब्दी उमर स्क्रीन पर दिखे। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने इलेवनलैब्स की AI आधारित वॉयस-क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल करके अपने लिए एक आवाज तैयार कर ली थी।
टूल्स पर नहीं मिलती सरकारी सहायता
वॉयस डिक्टेशन सॉफ्टवेयर जैसे फीचर्स दिव्यांगजनों के बहुत काम आ रहे हैं। इसकी मदद से वे टाइप करने की बजाय बोलकर ही अपने नोट्स और विचार भेज पाते हैं, लेकिन कुछ दिक्कतें भी हैं।
दरअसल, इन साधनों को सहायक तकनीक की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसी वजह से ये काफी महंगे होते हैं और इन पर सरकारी सब्सिडी भी नहीं मिलती।
इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों में भी समावेशिता की कमी देखी जाती है। विडंबना यह रही कि जिस जगह यह कार्यक्रम हो रहा था, वहां तक भी व्हीलचेयर से पहुंचना मुश्किल था। तकनीक भले ही सहायता कर रही है, लेकिन अभी भी सभी के लिए पहुंच को आसान बनाने का सफर काफी लंबा है।