भारतीय गैर-लाभकारी संस्थाएं AI उपयाेग और डिजिटल क्षमता में पीछे
भारतीय गैर-लाभकारी संस्थाएं (NGO) अभी भी डिजिटल की दुनिया में संघर्ष कर रहे हैं। डिजिटल फॉर नॉनप्रॉफिट्स (D4NP) की एक नई रिपोर्ट बताती है कि इस साल के लिए इन संस्थाओं की डिजिटल क्षमता 50 फीसदी से भी कम पाई गई।
जहां दूसरे सेक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल मुश्किल कामों के लिए कर रहे हैं, वहीं गैर-लाभकारी संस्थाओं ने अपनी रिपोर्ट और मार्केटिंग में मदद के लिए लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) में थोड़ी दिलचस्पी दिखाई है।
विज्ञापन अनुदान का नहीं कर रहे इस्तेमाल
चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) इस मामले में आगे है। उनकी टीम के कॉर्पोरेट अनुभव की वजह से वे डिजिटल टूल्स का अच्छा इस्तेमाल कर रहे हैं।
हैरानी की बात है कि कई संस्थाएं अपने हर महीने मिलने वाले 10,000 डॉलर (करीब 9.5 लाख रुपये) के विज्ञापन अनुदान (एड ग्रांट्स) का इस्तेमाल ही नहीं कर रही हैं। इस वजह से वे अपनी पहचान बनाने का एक आसान मौका गंवा रहे हैं।
D4NP के संस्थापक और गूगल के पूर्व कार्यकारी अभिनव चेतन का कहना है कि इस साल ज्यादा गैर-लाभकारी संस्थाएं AI को आजमा रही हैं, लेकिन ज्यादातर अभी भी इसे बस आसान कामों के लिए ही इस्तेमाल कर पा रही हैं। फिर भी उम्मीद है, क्योंकि अब ज्यादा संस्थाएं डिजिटल तौर पर आगे बढ़ रही हैं।