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TMC की 38 प्रतिशत सांसद महिलाएं, भाजपा सबसे पिछड़ी; जानें कांग्रेस-DMK की स्थिति
TMC संसद में महिलाओं को भागीदारी देने के मामले में सबसे आगे है

TMC की 38 प्रतिशत सांसद महिलाएं, भाजपा सबसे पिछड़ी; जानें कांग्रेस-DMK की स्थिति

लेखन आबिद खान
Apr 19, 2026
05:57 pm

क्या है खबर?

महिला आरक्षण पर संसद से सड़क तक संग्राम छिड़ा हुआ है। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक गिरने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा था। इस बीच लोकसभा में महिला सांसदों से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में भाजपा सबसे ज्यादा पिछड़ी हुई है।

TMC

TMC के कुल 29 सांसद, इनमें 11 महिलाएं

वर्तमान में लोकसभा में कुल 75 महिला सांसद हैं। ये कुल सांसदों का लगभग 14 प्रतिशत है। महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में TMC सबसे आगे है। लोकसभा में उसके कुल 29 सांसद हैं। इनमें से 11 महिलाएं हैं। यानी TMC के कुल 29 सांसदों में से लगभग 38 प्रतिशत महिलाएं हैं। ये सदन में किसी भी प्रमुख पार्टी के मुकाबले सबसे ज्यादा है। दूसरे नंबर पर मौजूद पार्टी और TMC के बीच 20 प्रतिशत अंकों का फासला है।

DMK

DMK के कुल सांसदों में 18 प्रतिशत महिलाएं

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में दूसरे नंबर पर है। DMK के कुल 22 सांसदों में से 4 महिलाएं हैं। यानी 18 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा। इसके बाद उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी आती है। जिसके कुल सांसद 37 हैं और इनमें से 5 महिलाएं हैं। यानी कुल सांसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 13.5 प्रतिशत। खास बात है कि शीर्ष की तीनों पार्टियों पर प्रधानमंत्री ने महिला विरोधी होने का आरोप लगाया था।

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कांग्रेस

क्या हैं कांग्रेस और भाजपा की स्थिति?

महिला सांसदों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस चौथे और भाजपा 5वें नंबर पर है। नवंबर 2024 में वायनाड से प्रियंका गांधी की उपचुनाव जीत के बाद कांग्रेस के लोकसभा में 99 सांसद हो गए हैं। इनमें से 14 महिलाए हैं। यानी 14.1 प्रतिशत। वहीं, भाजपा की लोकसभा में 31 महिला सांसद हैं। आंकड़े के लिहाज से यह सबसे ज्यादा है, लेकिन उसके कुल 240 सांसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 12.9 प्रतिशत है।

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संसद

संसद से पारित नहीं हो सका महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक

सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 3 विधेयक लेकर आई थी। इनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक था, जो संसद से पारित नहीं हो सका। विपक्ष का तर्क है कि 2023 वाला महिला आरक्षण विधेयक पहले से लागू है, ऐसे में सरकार नए संशोधन के जरिए केवल परिसीमन करना चाहती है। विपक्ष की मांग है कि सरकार वर्तमान लोकसभा सीटों पर ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दे।

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