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#NewsBytesExplainer: 1973 के बाद से क्यों नहीं हुआ परिसीमन, महिला आरक्षण के लिए ये क्यों जरूरी?
1973 के बाद देश में पहली बार परिसीमन प्रक्रिया होने जा रही है

#NewsBytesExplainer: 1973 के बाद से क्यों नहीं हुआ परिसीमन, महिला आरक्षण के लिए ये क्यों जरूरी?

लेखन आबिद खान
Apr 17, 2026
02:28 pm

क्या है खबर?

महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में 3 विधेयक पेश किए हैं। इनमें परिसीमन विधेयक, 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए महिला आरक्षण के साथ-साथ परिसीमन की अहम प्रक्रिया भी की जाएगा, जो 1973 के बाद से नहीं हुई है। आइए समझते हैं परिसीमन और महिला आरक्षण का क्या संबंध है।

परिसीमन

सबसे पहले परिसीमन के बारे में जानिए

किसी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है। इसके पीछे का मकसद यह है कि एक संसदीय सीट में लोगों की संख्या समान हो। दरअसल, समय के साथ किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या में बदलाव होता है। इसलिए परिसीमन के जरिए बदली हुई आबादी को समान रूप से प्रतिनिधित्व दिया जाता है। परिसीमन से सीटों की संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। परिसीमन आयोग ये कार्य करता है।

रुकावट

1973 के बाद से क्यों नहीं हुआ परिसीमन?

देश में आखिरी बार परिसीमन 1973 में हुआ था। यानी देश में अभी भी लोकसभा सीटों की सीमाएं 1971 की जनगणना पर आधारित है। इसके बाद आपातकाल के दौरान 1976 में सरकार ने 42वें संशोधन अधिनियम के जरिए परिसीमन पर 2001 तक रोक लगा दी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया था, उन्हें संसदीय प्रतिनिधित्व न खोना पड़े। 2001 में इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया।

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पिछले परिसीमन

देश में कब-कब किया गया परिसीमन?

1951 के शुरुआती जनगणना आंकड़ों के आधार पर पहले 489 संसदीय और 3,280 विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया गया था। इसके बाद लोकसभा सीटें बढ़कर 494 हो गईं। 1962 के चुनावों तक, जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधित्व के लिए लोकसभा में 14 सदस्य नामित किए गए। साथ ही जहां विधानसभा नहीं थी, उनके लिए भी सीटें बढ़ाई गईं। इस तरह कुल सीटें 522 हो गईं। 1973 के परिसीमन में 20 सीटें और सिक्किम के विलय के बाद एक सीट और जोड़ी गई।

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विधेयक

फिलहाल लाए गए विधेयकों में क्या प्रावधान हैं?

2001 में लाए गए 84वें संविधान संशोधन के मुताबिक, 2026 के बाद की पहली जनगणना तक परिसीमन नहीं होगा। इसे हटाने के लिए सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाई है। ताकि 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों का इंतजार करने के बजाय नवीनतम प्रकाशित जनगणना (संभवतः 2011) का उपयोग कर महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। इसके अलावा एक बड़ा प्रावधान लोकसभा की सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करना है। इनमें से 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।

जरूरी

महिला आरक्षण के लिए परिसीमन क्यों है जरूरी?

दरअसल, विधेयक के कानून बनने के बाद विधानसभा और लोकसभा की सीटें आरक्षित होंगी। अगर परिसीमन नहीं किया जाए तो कौन सी सीट आरक्षित होगी और कौन सी नहीं इसका निर्धारण करने का कोई पैमाना नहीं होगा। अगर बिना परिसीमन के किसी सीट को आरक्षित कर दिया जाए तो विवाद खड़ा हो सकता है। एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि महिला आरक्षण के बाद पुरुषों का प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

आरक्षण

महिलाओं को कब तक मिल सकता है 33 प्रतिशत आरक्षण

वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होना चाहिए। 2026 के बाद पहली जनगणना 2031 में होनी है, लेकिन 2021 में होनी वाली जनगणना कोरोना की वजह से नहीं हो पाई जो अब हो रही है। हालांकि, सरकार ने एक संविधान संशोधन के जरिए इस बाध्यता को खत्म कर दिया है। अगर परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर हुआ तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है।

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