Loading...
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, फॉर्म-6 और SIR मुद्दों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, फॉर्म-6 और SIR मुद्दों पर क्या कहा?

लेखन गजेंद्र
Oct 27, 2026
09:37 am

क्या है खबर?

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), फॉर्म-6 और अन्य तमाम मुद्दों पर उठ रहे सवालों के जवाब में एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है। यह हलफनामा राकेश कुमार सिंह की अर्जी के जवाब में दाखिल किया गया है। याचिका में शक्ति के धीरे-धीरे केंद्रीयकरण, एजेंडा और मिनट्स की गैर-मौजूदगी, इलेक्टोरल-रोल प्रक्रिया में बदलाव और बिना सर्वसम्मति से फैसले लिए जाने का आरोप है। आयोग ने सभी सवालों पर क्या जवाब दिया? आइए, जानते हैं।

जवाब

फॉर्म-6 में बदलावों पर क्या बोला आयोग?

नए पंजीकरण के लिए बनाए गए फॉर्म-6 में अचानक बदलावों के आरोपों पर आयोग ने कहा कि उसने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है, क्योंकि सिर्फ़ केंद्र सरकार ही इसमें बदलाव कर सकती है।

हलफनामे में कहा गया है कि SIR की घोषणा एक अलग दस्तावेज है। हालांकि, आयोग ने माना कि जिस तरह से ऑनलाइन घोषणा की गई थी, उससे ऐसा समझा जा सकता है कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया हो।

विवाद

फॉर्म-6 पर क्या है विवाद?

फॉर्म-6 उन लोगों को भरना होता है जो पहली बार मतदाता के तौर पर पंजीकरण करना चाहते हैं।हालांकि, इसका इस्तेमाल आयोग अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची के SIR के दौरान कर रहा है।

आरोप है कि बदले गए फॉर्म-6 में नए आवेदकों को यह बताने को कहा जा रहा है कि उनका नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम, पहले के SIR-युग के वोटर लिस्ट में था या नहीं।

इससे पहले फॉर्म-6 में इस पूछताछ का कॉलम नहीं था।

ADVERTISEMENT

जवाब

SIR पर आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने कहा कि 24 जून, 2025, 27 अक्टूबर, 2025 और 14 मई, 2026 के सभी 3 SIR आदेश, आयोग के एकमत फैसलों पर जारी थे,आयोग पर आरोप लगाने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है।

आयोग ने कहा कि आमतौर पर फाइलों को पहले एक आयुक्त और फिर दूसरा आयुक्त देखता है, और फिर उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के सामने रखा जाता है।

त्वरित मामलों में, मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लिए जाते हैं और बाद में फाइल में रिकॉर्ड होते हैं।

ADVERTISEMENT

जवाब

कोई सुझाव या आपत्ति आयोग का फैसला नहीं

हलफमाने के मुताबिक, फाइल एक-दूसरे के पास जाने की प्रक्रिया के दौरान किसी भी आयुक्त का कोई सुझाव या सवाल, CEC और दूसरे चुनाव आयुक्त एक्ट, 2023 की धारा-18 के तहत आयोग का फैसला नहीं माना जाएगा।

बता दें, आयोग में CEC और 2 आयुक्त होते हैं। जब भी तीनों में एक राय नहीं होती, तो बहुमत के आधार पर फैसले लेने पड़ते हैं।

याचिका में मांग है कि धारा-18 के उल्लंघन के बाद निर्णयों को अवैध घोषित करना चाहिए।

सवाल

आयोग ने याचिका पर ही उठाया सवाल

आयोग ने अपने हलफनामे में याचिका पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि ये सिर्फ एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है और मेंटेनेबल नहीं है।

आयोग ने कहा, "कानून की नज़र में, किसी अखबार की रिपोर्ट को उसके बताए गए फैक्ट्स का सबूत नहीं माना जाता।आयोग ने न तो किसी न्यूज एजेंसी को कोई इंटरनल नोट जारी किया है और न ही उसे जारी करने की इजाजत दी है।"

आयोग मामले में विस्तार से जवाब देगा।

नेट

आयोग ने कहा- वेबसाइट और ऐप दुरुस्त

विवादित ECINet पर, आयोग ने कहा कि इलेक्टोरल पंजीयन अधिकारी (ERO) के आदेश के अलावा कोई भी एंट्री जोड़ी, हटाई या बदली नहीं जा सकती।

उसने कहा कि ECINet कानून का पालन कर रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए 14 अक्टूबर, 2026 को एक कमेटी बनाई गई थी, जिसमें IIT मुंबई और IISc बेंगलुरु के 2 स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल थे।

बता दें, सिंह की याचिका के साथ राहुल गांधी समेत विपक्ष की लंबित याचिका पर भी सुनवाई होगी।

ADVERTISEMENT