लोकसभा में ट्रांसजेंडर के अधिकारों से जुड़ा संशोधन विधेयक पारित, जानिए क्यों हो रहा विरोध
क्या है खबर?
लोकसभा में मंगलवार को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक विपक्ष की आलोचना के बीच पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार ट्रांसजेंडर लोगों के खुद से लैंगिक पहचान के अधिकार को समाप्त करने और ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को पुनर्परिभाषित करने के लिए यह विधेयक लाई थी। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस संशोधन के पारित होने से कानूनी स्पष्टता आएगी।
विधेयक
विधेयक का क्यों हो रहा विरोध?
इस महीने की शुरुआत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 संशोधन के लिए पेश किया गया था। इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान, ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया और लिंग-पुष्टि देखभाल प्रक्रियाएं करने वाले चिकित्सा संस्थानों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित संशोधन शामिल हैं। इस विधेयक को पेश किए जाने के बाद देशभर के ट्रांसजेंडर समुदायों ने कड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। सरकार की राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद के सामुदायिक प्रतिनिधि सदस्यों ने परामर्श न करने का आरोप लगाया।
विरोध
राहुल गांधी ने किया विरोध
विधेयक का लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी विरोध किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह संशोधन भाजपा सरकार का ट्रांसजेंडर लोगों के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर खुला हमला है, जो उनसे स्वयं की पहचान तय करने का अधिकार छीनता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों को एक मेडिकल बोर्ड द्वारा अमानवीय जांच से गुजरने के लिए मजबूर करता है, बिना सुरक्षा उपाय के आपराधिक दंड और निगरानी की व्यवस्था को लागू करता है।
बदलाव
कानून में क्या-क्या बदलाव हुए?
वर्ष 2019 के कानून को सरकार ने अधूरा बताया है, जिसमें जरूरी संशोधन हुए हैं। संशोधन विधेयक के पारित होने से ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा सीमित होगी। अगर कोई व्यक्ति जन्म के समय निर्धारित लिंग से अलग कोई लिंग महसूस करता है तो वह इसमें शामिल नहीं होगा। जन्मजात ट्रांसजेंडर, जबरन ट्रांसजेंडर बनाए गए व्यक्ति इसमें शामिल होंगे। सर्जरी या हार्मोन परिवर्तन से बने ट्रांसजेंडर को मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र लेना जरूरी है। इसमें जिलाधिकारी को बड़े अधिकार मिले हैं।
मांग
स्थायी समिति में भेजने की मांग
विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध करते हुए इस संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी, जिसे नहीं माना गया। संसद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले, कांग्रेस की एस जोतिमणि, समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की टी सुमथि, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, तृणमूल कांग्रेस की जून मालिया और प्रियंका गांधी ने विरोध किया। उन्होंने इसे ट्रांसजेंडर के अधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 का हनन बताया है।