थलापति विजय ने परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, बोले- दक्षिण को नुकसान होगा
क्या है खबर?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्ट्री कड़गम (TVK) के नेता थलापति विजय ने राज्य विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है। इसमें विजय ने केंद्र से लोकसभा-राज्यसभा अनुपात को 2.2:1 पर बनाए रखने और लोकसभा की सीटें 543 ही बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिसीमन अगर जनसंख्या के आधार पर लागू किया जाता है, तो तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।
मांग
प्रस्ताव में क्या-क्या है?
TVK ने प्रस्ताव में 3 प्रमुख मांगें रखी हैं- मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को स्थायी रूप से बनाए रखना; हर राज्य को वर्तमान में आवंटित सीटों को स्थायी बनाना; और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना।
विजय ने कहा, "यदि परिसीमन विधेयक पारित हो जाता है, तो जनसंख्या नियंत्रण को सफलतापूर्वक लागू करने वाले दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संख्या को स्थिर करना जरूरी है।"
प्रस्ताव
TVK ने कहा- 2011 की जनसंख्या के आधार पर हो परिसीमन
प्रस्ताव में कहा गया है, "तमिलनाडु समेत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की जनसंख्या की गणना 50 वर्षों से अधिक समय से नहीं हुई है। अगली जनगणना 2026 में होनी थी। चूंकि पिछले 50 वर्षों से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं हुआ है, 2011 की जनसंख्या जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए और संविधान संशोधन विधेयक लाकर लोकसभा और विधानसभा सदस्यों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 की जानी चाहिए।"
महिला आरक्षण
TVK ने महिला आरक्षण का समर्थन किया
TVK ने महिला आरक्षण का समर्थन किया है। हालांकि, पार्टी ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू करने की बात कही है।
इससे एक दिन पहले TVK ने राज्य विधानसभा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के खिलाफ 2 अलग-अलग प्रस्ताव पारित किए। TVK ने NEET परीक्षा को खत्म करने की मांग करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय और राज्य के अधिकारों के खिलाफ है।
विधेयक
मानसून सत्र में ही परिसीमन विधेयक लाने की चर्चाएं
चर्चाएं हैं कि सरकार संसद के मानसून सत्र में ही परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक ला सकती है। इसके लिए विशेष सत्र बुलाए जाने की भी अटकलें हैं।
इसी साल अप्रैल में भी विधेयक पेश किए गए थे, लेकिन दो तिहाई बहुमत से पारित नहीं हो सके थे।
हालांकि, अब NDA का कुनबा बढ़ने के बाद सरकार नए सिरे से विधेयकों को पारित कराने की कोशिश में जुटी है।