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ममता बनर्जी की चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
ममता बनर्जी की चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

ममता बनर्जी की चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Sep 21, 2026
02:00 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह 'फूल और घास' के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए भी सहमत हो गया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया है।

दलील

सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने दी तीखी दलील

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।

सिब्बल ने कहा, "यहां कुछ बेहद असाधारण हुआ है। आयोग द्वारा हमें जून में नोटिस दिया गया था और हमने जुलाई में विस्तृत जवाब भी दाखिल कर दिया था। इस पूरे विवाद के आयोग में विचाराधीन होने के बीच पार्टी के चिन्ह को अचानक फ्रीज कर दिया गया। आखिर यह क्या चल रहा है?"

सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कही दोनों पक्षों को मौका देने की बात

सिब्बल की दलील पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाला पीठ ने कहा, "जब मामला सुनवाई के लिए आएगा, तब दोनों पक्षों को अपनी दलीलें पेश करने का पूरा अवसर मिलेगा। हम इसे इसी सप्ताह सूचीबद्ध करने का प्रयास करेंगे।"

इससे साफ है कि बनर्जी की याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है और इस मामले में कोई बड़ा आदेश आ सकता है।

हालांकि, यह किसके पक्ष में होगा, इसका निर्णय कोर्ट के हाथों में रहेगा।

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आदेश

चुनाव आयोग द्वारा दिए गए नए नाम और अंतरिम चिन्ह

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग अंतरिम नाम और चिन्हों की घोषणा की थी।

आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता गुट की पार्टी को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था।

इसी तरह रितब्रत बनर्जी वाले विरोधी गुट के दल को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है।

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विवाद

विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार के बाद TMC में हुआ बिखराव

TMC के भीतर यह अंदरूनी कलह और विभाजन इसी साल हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद शुरू हुआ था।

15 साल तक सत्ता में रहने के बाद TMC को चुनाव में शिकस्त झेलनी पड़ी, जहां भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई, जबकि TMC का आंकड़ा गिरकर महज 80 रह गया।

उसके बाद ममता ने विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को निष्कासित कर दिया था।

विद्रोह

TMC के 57 विधायकों ने की बगावत

रितब्रत और संदीपान के निष्कासन के बाद पार्टी के 78 में से 57 विधायकों ने बगावत कर दी और रितब्रत को अपना समर्थन दे दिया।

विद्रोही गुट ने मूल पार्टी के नाम और चिन्ह पर अपना दावा ठोक दिया।

3 जून को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र नाथ बोस ने 58 विद्रोही विधायकों को मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता देते हुए रितब्रत को नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया। इससे TMC पूरी तरह से टूट गई।

बगावत

TMC के सांसदों ने भी की बगावत

विधायकों के बाद TMC के 20 विद्रोही सांसद 'राष्ट्रवादी सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' में शामिल हो गए और उन्होंने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दे दिया।

इसके अलावा राज्यसभा में भी सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव सहित प्रमुख सदस्यों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।

ममता ने याचिका में आयोग के अंतरिम आदेश को पूरी तरह अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।

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