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पवन खेड़ा की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, मुख्यमंत्री सरमा के 'अपशब्दों' का जिक्र
पवन खेड़ा की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

पवन खेड़ा की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, मुख्यमंत्री सरमा के 'अपशब्दों' का जिक्र

लेखन गजेंद्र
Apr 30, 2026
01:56 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान खेड़ा की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी और असम पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखी बहस देखने को मिली। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और एएस चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। खेड़ा ने कोर्ट को बताया कि उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।

सुनवाई

किसने क्या तर्क किया?

खेड़ा ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर लगाए गए आरोपों के मामले में उनको गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं है, उनको सरमा के खिलाफ बयान के कारण परेशान किया जा रहा है। असम पुलिस ने तर्क दिया कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ झूठे दावे करने के लिए पासपोर्ट सहित जाली दस्तावेज दिखाए थे और हिरासत से पता चलेगा कि उसके सहयोगी कौन थे और क्या इसमें विदेशी तत्व शामिल थे।

सुनवाई

सिंघवी बोले- अंबेडकर होते तो कब्र में करवट ले लेते

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सिंघवी ने मुख्यमंत्री सरमा के बयानों पर कहा, "कृपया असम क्रॉनिकल में प्रकाशित लेख देखें, जिनके ठीक बीच में आपत्तिजनक शब्द 'पेलुंगा', 'पेड़ा बना दूंगा' लिखा है। डॉ अंबेडकर अपनी कब्र में करवट बदल लेते अगर उन्होंने कभी कल्पना की होती कि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति 'संवैधानिक काउबॉय' या 'संवैधानिक रैम्बो' की तरह व्यवहार कर रहा है...ये अभियोजक के बॉस हैं।" सिंघवी ने कहा, "खेड़ा फरार नहीं होंगे, तो हिरासत की जरूरत क्या है।"

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सवाल

असम पुलिस की धाराओं पर सवाल उठाया

सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री खेड़ा की गिरफ्तारी न होने पर अपनी पुलिस को धमकाते दिख रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 के तहत सार्वजनिक उपद्रव का अपराध कैसे लागू किया जा सकता है, जबकि यह एक गंभीर अपराध है और खेड़ा पर सरमा को बदनाम करने का आरोप है, तो सार्वजनिक उपद्रव कैसे हुआ। सिंघवी ने कहा कि अग्रिम जमानत एक अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं है।

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तर्क

असम पुलिस ने हिरासत के लिए क्या तर्क दिया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "मामले में पासपोर्ट की प्रतियां नकली, छेड़छाड़ की हुई और मनगढ़ंत दस्तावेज हैं।" उन्होंने हिरासत को जरूरी बताते हुए तर्क दिया, "उनके साथी कौन हैं? उस पासपोर्ट की मुहर किसने बनाई, सरकार की वह आधिकारिक मुहर किसने बनाई? हमें यह साबित करना होगा कि उसने पासपोर्ट से एक व्यक्ति की तस्वीर हटाकर उसकी जगह दूसरी महिला की तस्वीर, क्यूआर नंबर, मुहरें आदि कैसे चिपकाईं। इससे कई अन्य जाली दस्तावेजों का पता चल सकता है।"

मामला

क्या है मामला?

असम में चुनाव से 2 दिन पहले कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी रिनिकी के पास 3 मुस्लिम देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने सरमा परिवार के पास दुबई में संपत्ति और अमेरिका में 52,000 करोड़ रुपये की कंपनी का दावा किया। रिनिकी की FIR पर असम पुलिस खेड़ा को गिरफ्तार करने दिल्ली पहुंची थी। खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका गुवाहाटी हाई कोर्ट से रद्द हो चुकी है।

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