तमिलनाडु में कमाल कर पाएंगे अन्नामलाई? क्या हैं मजबूती और कमजोरियां?
क्या है खबर?
तमिलनाडु भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे के अन्नामलाई ने कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीति को आम लोगों तक ले जाना चाहते हैं। अन्नामलाई ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की बात भी कही है। IAS छोड़कर राजनीति में आए अन्नामलाई की इस नई पारी की सफलता तो भविष्य बताएगा, लेकिन इससे पहले उनकी मजबूती और कमजोरियों पर नजर डालते हैं।
लोकप्रियता
अन्नामलाई की व्यक्तिगत लोकप्रियता सबसे बड़ी मजबूती
तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई ने जिस रफ्तार से कदम बढ़ाए थे, वैसी गति शायद ही किसी नेता को मिली हो। 2020 में भाजपा में शामिल होने के भीतर ही वे पार्टी के तमिलनाडु अध्यक्ष बन गए। अपनी भाषण कला, ऊर्जावान प्रचार शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति के बल पर उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा की छवि को बदलने में सफलता प्राप्त की। जानकार कहते हैं कि अन्नामलाई आज राज्य में अकेले भाजपा से ज्यादा लोकप्रिय हैं।
भाजपा
भाजपा छोड़ने से बढ़ सकता है समर्थकों का दायरा
अन्नामलाई ने भले ही राजनीति में कदम भाजपा से रखा हो, लेकिन यही भाजपा उनके विकास में बाधा बन रही थी। विश्लेषकों का तर्क था कि भाजपा से जुड़ाव तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता को सीमित कर रहा था, चूंकि पार्टी को मतदाताओं के एक बड़े वर्ग के बीच अभी भी प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा छोड़कर अन्नामलाई अब उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं, जो उनके समर्थक, लेकिन भाजपा के विरोधी हैं।
समय
सियासी उठापटक भी अन्नामलाई के पक्ष में
अन्नामलाई ने ऐसे वक्त पर ये कदम उठाया है, जब तमिलनाडु की राजनीति अभूतपूर्व बदलावों से गुजर रही हैं। थलापति विजय की सफलता इसका सबूत है। दशकों में पहली बार किसी गैर द्रविड पार्टी ने राज्य की सत्ता कब्जाई है। अन्नामलाई द्रविड़ पार्टियों के ऐसे महत्वाकांक्षी नेताओं को भी आकर्षित कर सकते हैं, जिन्हें स्थापित पार्टियों में सीमित संभावनाएं दिखती हैं। जानकारों के मुताबिक, इससे छोटी पार्टियों और उभरते नेताओं का गठबंधन बनाने में मदद मिल सकती है।
कमजोरी
खुद 2 बार चुनाव हार चुके हैं अन्नामलाई
लोकप्रियता के बावजूद अन्नामलाई की बड़ी कमजोरी उनका चुनावी प्रदर्शन है। उनके नेतृत्व में भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव और 2026 के विधानसभा चुनाव में ही उल्लेखनीय बढ़त हासिल नहीं कर सकी। हालांकि, पार्टी के वोट शेयर और लोकप्रियता जरूर बढ़ी है। अन्नामलाई खुद चुनाव नहीं जीत सके। 2021 का विधानसभा चुनाव वे 30,000 से भी ज्यादा वोटों से हार गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें कोयंबटूर सीट से हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा
भाजपा के प्लान बी होने का आरोप
बिना किसी विवाद के भाजपा छोड़ने के बावजूद अन्नामलाई के लिए भाजपा से पूरी तरह दूरी बनाना मुश्किल हो सकता है। विपक्ष उनके भाजपा से अलग होने को पहले ही एक सोची-समझी रणनीति बता रहा है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि ये भाजपा-RSS का प्लान बी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन मिला हुआ है। विरोधी उन्हें भाजपा के अनौपचारिक सहयोगी के रूप में पेश कर रहे हैं।
अन्य चुनौतियां
अन्नामलाई के सामने ये चुनौतियां भीं
अन्नामलाई ने आज के भाषण में नैतिकता, नेतृत्व और राजनीति में आम लोगों की भागीदारी पर बात की, लेकिन कोई स्पष्ट वैचारिक ढांचा पेश नहीं किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कोई भी विचारधारा स्थायी नहीं होती। ये विचारधारा में स्पष्टता का संकेत दे रहा है। अन्नामलाई के सामने शुरू से शुरुआत करने की भी चुनौती है। इतिहास गवाह है कि तमिलनाडु में लोकप्रिय नेताओं को भी लोकप्रियता को संगठनात्मक शक्ति में बदलने में संघर्ष करना पड़ा है।