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नितिन नबीन की टीम में उत्तर प्रदेश का दबदबा, 2027 चुनावों के लिए कैसे साधे गए समीकरण?
नितिन नबीन की टीम में उत्तर प्रदेश का खास महत्व मिला है

नितिन नबीन की टीम में उत्तर प्रदेश का दबदबा, 2027 चुनावों के लिए कैसे साधे गए समीकरण?

लेखन आबिद खान
Aug 18, 2026
12:49 pm

क्या है खबर?

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने आखिरकार अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। इसमें युवा और अनुभवी नेताओं के संतुलन के साथ सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिख रही है। साथ ही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर भी खास ध्यान केंद्रित किया गया है, जो नितिन के लिए पहली बड़ी परीक्षा होने वाली है। आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश को टीम में कितना महत्व मिला है।

टीम

सबसे पहले नितिन की नई टीम के बारे में जानिए

नितिन ने अपनी नई टीम में कुल 65 पदाधिकारी बनाए हैं। इनमें 12 महिलाओं को जगह मिली है।

14 पुराने नेताओं को बरकरार रखा गया है, जबकि 51 नए चेहरों को मौका दिया गया है।

अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होना है, वहां से 18 नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें भी उत्तर प्रदेश का दबदबा है। यहां के 8 नेताओं को टीम में जगह मिली है।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश से किन नेताओं को मिली जगह?

उत्तर प्रदेश के 8 नेताओं को नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इनमें 2 उपाध्यक्ष, 2 राष्ट्रीय महासचिव, 2 राष्ट्रीय मंत्री और 2 मोर्चों के अध्यक्ष बनाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश से तारिक मंसूर और रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव, डॉक्टर भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है।

साथ ही अमरपाल मौर्य को OBC मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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समीकरण

नियुक्तियों के जरिए कैसे साधे गए उत्तर प्रदेश के समीकरण?

उत्तर प्रदेश की नियुक्तियों में बड़े चेहरे, जातिगत प्रतिनिधित्व, अल्पसंख्यकों तक पहुंच और संगठनात्मक अनुभव वाले नेताओं के जरिए समीकरण साधने की कोशिश हुई है।

हरीश द्विवेदी ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि रेखा वर्मा, संगीता यादव और अमरपाल मौर्य OBC का। वहीं, भाजपा सांसद भोला सिंह अनुसूचित जाति (SC) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पार्टी की राष्ट्रीय टीम में 2 मुस्लिम चेहरे उत्तर प्रदेश के पसमांदा समुदाय से आते हैं- तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली।

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स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी की वापसी बेहद अहम

2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के केएल शर्मा से हार के बाद ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। संगठन में उनकी वापसी बता रही है कि भाजपा चर्चित चेहरों को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंप रही है।

ईरानी प्रखर वक्ता, प्रभावी महिला चेहरा और संगठन से सीधा जुड़ाव रखने वाली नेता हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

जातिगत

समाजवादी पार्टी के PDA की काट निकालने की कोशिश

समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति ने उसे गैर-यादव OBC, दलितों और मुसलमानों के बीच समर्थन जुटाने में मदद की। नबीन ने नई टीम में इसका काट निकालने की कोशिश की है। इसीलिए ब्राह्मण, OBC, दलित और पसमांदा मुस्लिमों को जगह मिली है।

इसके जरिए संकेत दिया जा रहा है कि भाजपा अपने पारंपरिक उच्च जाति के समर्थन और हिंदुत्व के मुद्दे पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय सामाजिक गठबंधन को संतुलित करना चाहती है।

महिलाएं

उत्तर प्रदेश से 3 महिलाओं को भी जगह

उत्तर प्रदेश की 3 महिलाओं को राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है- स्मृति ईरानी, ​​रेखा वर्मा और संगीता यादव। ये पार्टी की उसी रणनीति का विस्तार है, जिसके तहत आधी आबादी को साधने की व्यापक कोशिश की गई है, जिन्होंने मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

संगठन में महिला नेताओं की उपस्थिति पार्टी के इस एजेंडे को वोटों में बदलने में मददगार हो सकती है।

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