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राज्यसभा चुनाव 2026: 10 राज्यों की 37 सीटों पर मुकाबला, कौन चुना जा सकता है निर्विरोध?
राज्यसभा के लिए 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को होंगे चुनाव

राज्यसभा चुनाव 2026: 10 राज्यों की 37 सीटों पर मुकाबला, कौन चुना जा सकता है निर्विरोध?

Mar 09, 2026
07:56 pm

क्या है खबर?

देश के 10 राज्यों की 37 सीटों पर आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई दिग्‍गजों का निर्विरोध चुना जाना तय है, लेकिन फिर भी सभी राजनीतिक दल जोर-शोर से इसकी तैयारियों में जुटे हैं। चुनाव आयोग ने गत 26 फरवरी को मतदान का शेड्यूल जारी कर दिया है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है।

कार्यक्रम

क्या है राज्यसभा सदस्यों के चुनाव का कार्यक्रम?

चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन सीटों पर नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 मार्च तय की गई है। एक से अधिक उम्मीदवार होने पर 16 मार्च को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान किया जाएगा। उसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

#1

बिहार में नीतीश और नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना तय

कई राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच पहले से तय समीकरणों के चलते कई उम्मीदवारों के निर्विरोध राज्यसभा पहुंचने की संभावनाएं हैं। बिहार की 5 सीटों में से 4 पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मजबूत पकड़ है। मुख्यमंत्री और जतना दल यूनाइटेड (JDU) संयोजक नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पहले से ही पार्टी की प्राथमिक सूची में हैं। हालांकि, 5वीं सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एडी सिंह को उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया।

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महाराष्ट्र और असम में क्या रहेगी स्थिति?

महाराष्‍ट्र में कुल 7 सीटों पर चुनाव होना है, लेकिन यहां से भी कई बड़े नाम निर्विरोध राज्यसभा पहुंचते दिख रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) में शरद पवार, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के रामदास आठवले और भाजपा के विनोद तावड़े जैसे दिग्गजों की वापसी तय मानी जा रही है। असम की 3 सीटों पर NDA को स्पष्ट बढ़त है। जोगेन मोहन, तेराश गोवाला और प्रमोद बोरो के निर्विरोध चुने जाने की राह साफ मानी जा रही है।

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तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में 8 उम्‍मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की उम्मीद

तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK, AIADMK और अन्य दलों के समीकरणों के चलते 6 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना है। इनमें तिरुचि शिवा (DMK) और एम थंबीदुरई (AIADMK) प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा एक-एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी हैं। कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम और भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। अन्य उम्मीदवारों के न होने से दोनों के निर्विरोध चुने जाने के आसार हैं।

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पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में कौन भारी?

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों पर चुनाव होने हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाबुल सुप्रियो और कोयल मल्लिक जैसे नामों के निर्विरोध चुने जाने की चर्चाएं हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने आखिर तक अपने पूरे पत्ते नहीं खोले हैं। हिमाचल प्रदेश में सिर्फ एक सीट है, जिस पर कांग्रेस का बहुमत साफ है। पार्टी ने अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाया है। यही वजह है कि हिमाचल में राज्‍यसभा चुनाव को लेकर कोई हलचल नजर नहीं आ रही है।

जानकारी

तेलंगाना में कांग्रेस और BRS में हुआ बंटवारा

तेलंगाना में राज्‍यसभा की 2 सीटों पर चुनाव होने हैं, लेकिन यहां भी दोनों सीटों पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने जाने की संभावना है। दरअसल, कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच एक-एक सीट का बंटवारा हो गया है।

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ओडिशा और हरियाणा में कुल 6 सीटों पर मुकाबला

ओडिशा में राज्‍यसभा की 4 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस ने बीजू जनता दल (BJD) का समर्थन दे दिया है। वहीं, भाजपा ने निर्दलीय दिलीप राय को समर्थन देकर प्रतिद्वंद्विता बढ़ा दी है। ऐसे में यह कड़ा मुकाबला हो सकता है। इसी तरह हरियाणा में राज्‍यसभा की 2 सीटों पर चुनाव है। भाजपा ने केवल एक उम्मीदवार उतारा है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच टकराव की संभावना है।

चुनाव

कैसे होते हैं राज्यसभा सदस्य के लिए चुनाव?

राज्यसभा के चुनाव में जनता सीधे वोट नहीं डालती है। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों के विधायक (MLA) करते हैं। यह अप्रत्यक्ष चुनाव होता है। राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, जिनमें से 233 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। मतदान में विधायक बैलेट पेपर पर 1, 2, 3 के क्रम में प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं। इसे एकल हस्तांतरणीय वोट प्रणाली कहा जाता है।

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