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राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा- पहले वोट चोरी और अब पार्टी चोरी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव आयोग द्वारा दिए गए आदेश को लेकर हमला बोला है

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा- पहले वोट चोरी और अब पार्टी चोरी

Sep 18, 2026
01:14 pm

क्या है खबर?

चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नाम और उसका चुनाव चिह्न 'फूल और घास' फ्रीज किए जाने के फैसले के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस बड़े प्रशासनिक कदम पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को भारतीय लोकतंत्र की गिरावट का प्रतीक बताया है।

हमला

राहुल ने कैसे बोला हमला? 

राहुल ने एक्स पर आयोग के फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, 'वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी। ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।'

उन्होंने लिखा, 'जब पूरी पार्टी चुराई जा सकती है, तो कोई आश्चर्य नहीं है कि करोड़ों भारतीयों के वोट भी चुराए जा सकते हैं। चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना था, लेकिन वह उन ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।'

लड़ाई

यह केवल ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं- राहुल

राहुल ने आगे लिखा, 'यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है। यह हर उस राजनीतिक दल, हर उस मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।'

गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनके सिंबल छीनने का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे पहले यही समान पैटर्न शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में भी दोहराया जा चुका है।

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जानकारी

कांग्रेस का 'लेट नाइट गिफ्ट' तंज

इस मामले पर कांग्रेस पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस ने आयोग के इस फैसले को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन का 'लेट नाइट बर्थडे गिफ्ट' करार दिया है।

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कारण

आयोग ने क्यों की यह कार्रवाई?

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों के लिए TMC के 2 गुटों ने उम्मीदवार उतारे थे।

दोनों गुट मूल TMC की पहचान और चिन्ह पर दावा ठोक रहे थे। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी का है और दूसरा गुट रितब्रत बनर्जी का है।

इस विवाद पर आयोग ने गुरुवार रात एक अंतरिम आदेश देकर दोनों ही गुटों को उपचुनाव में पार्टी के नाम और चिन्ह का उपयोग करने पर रोक लगा दी।

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