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राघव चड्ढा ने राइट-टू-रिकॉल का मुद्दा उठाया, कहा- जनता को सांसद-विधायक को हटाने का अधिकार मिले
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में राइट टू रिकॉल का मुद्दा उठाया

राघव चड्ढा ने राइट-टू-रिकॉल का मुद्दा उठाया, कहा- जनता को सांसद-विधायक को हटाने का अधिकार मिले

लेखन गजेंद्र
Feb 11, 2026
04:44 pm

क्या है खबर?

राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी के (AAP) सांसद राघव चड्ढा ने 'राइट टू रिकॉल' का मुद्दा उठाया और जनता को अपने जन प्रतिनिधि को हटाने का अधिकार देने की मांग की। चड्ढा ने संसद में कहा कि अगर मतदाता नेता को हायर यानी पद पर बैठा सकते हैं, तो उन्हें फायर यानी पद से हटाना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय मतदाताओं के पास चुनाव का अधिकार है, तो उनके पास 'राइट टू रिकॉल' भी होना चाहिए।

बहस

जनता 5 साल खराब सांसद-विधायक क्यों बर्दाश्त करे- चड्ढा

चड्ढा ने सभापीठ की अनुमति से उठाए गए मामलों पर भाषण देते हुए कहा, "राइट टू रिकॉल ऐसा सिस्टम है जो मतदाताओं को चुने हुए प्रतिनिधि को, ड्यूटी पूरी न करने पर उसकी अवधि खत्म होने से पहले हटाने का अधिकार देता है। अगर हम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, जज पर महाभियोग और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, तो मतदाताओं को 5 साल तक एक खराब सांसद या विधायक को बर्दाश्त करने के लिए क्यों मजबूर किया जाना चाहिए।"

अधिकार

यह अधिकार जनता को मजबूत बनाना है- चड्ढा

चड्ढा ने कहा, "यह अधिकार नागरिकों को मज़बूत बनाता है। यह पार्टियों को उम्मीदवारों को मैदान में उतारने, भ्रष्टाचार को कम करने और लोकतंत्र को वापस जवाबदेही में लाने के लिए प्रेरित करेगा। मतदाताओं को किसी को वोट देने का अधिकार है और उन्हें ऑफिस से हटाने का भी अधिकार होना चाहिए।" सांसद ने कहा कि 5 साल बहुत लंबा समय है। ऐसा कोई प्रोफेशन नहीं है जहां आप 5 साल तक बिना किसी नतीजे के खराब परफॉर्म करें।

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अधिकार

दुनिया के कई देशों में यह अधिकार

चड्ढा ने बताया कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा जैसे 24 देशों में यह अधिकार जनता को दिया गया है। चड्ढा ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैलिफोर्निया में गर्वनर क्रिस डेविस को 2002 में चुना गया था, उनके समय में बिजली कटौती, गोलीबारी आदित वारदातें हुईं। इसके बाद 10 लाख क्षेत्रीय लोगों ने रिकॉल याचिका दायर की। वहां चुनाव आयोग ने रिकॉल कराया और 55 प्रतिशत लोगों ने उनको बर्खास्त करने की मांग की। बाद में उन्हें हटा दिया गया।

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विचार

कैसे काम करे रिकॉल अधिकार? चड्ढा ने बताया

चड्ढा ने बताया कि रिकॉल कानून का गलत इस्तेमाल न हो, इसके लिए कोई भी रिकॉल वोट से पहले 35 से 45 प्रतिशत मतदाताओं को एक सत्यापित याचिका के जरिए रिकॉल ट्रिगर का समर्थन करना चाहिए। चुनाव के बाद कम से कम 18 महीने का समय जन प्रतिनिधियों को क्षेत्र में काम करने का मिलना चाहिए, ताकि उन्हें तुरंत निशाना न बनाया जाए। रिकॉल सिर्फ गंभीर मामलों में हो और 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का हटाने में समर्थन हो।

ट्विटर पोस्ट

राघव चड्ढा का भाषण

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