पंजाब: जालंधर में गुरुद्वारे के बाहर आम आदमी पार्टी के नेता की गोली मारकर हत्या
क्या है खबर?
पंजाब के जालंधर में शुक्रवार तड़के बड़ी वारदात सामने आई है। यहां बंदूकधारी बदमाशों ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता लकी ओबरॉय की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात को पॉश मॉडल टाउन इलाके में गुरुद्वारे के बाहर अंजाम दिया गया है। लकी को 3 गोलियां सीने और सिर में लगी थीं। उन्हें फोर्टिस अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। गोलीबारी के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। लकी पेशे से फाइनेंसर थे।
हत्या
स्कूटी पर सवार थे हमलावर
द ट्रिब्यून के मुताबिक, लकी तड़के अपनी थार कार से गुरुद्वारे पहुंचे थे। वे जैसे ही मत्था टेककर अपनी कार में बैठे थे, तभी एक्टिवा स्कूटी पर सवार हमलावरों ने उन पर तड़ातड़ गोलियां चला दीं। AAP के जालंधर कैंट हलका प्रभारी राजविंदर थियारा ने कहा कि गुरुद्वारे जाना लकी की दैनिक दिनचर्या थी और हमलावरों को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने 15 से 16 राउंड गोलीबारी की थी।
ट्विटर पोस्ट
घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस
VIDEO | Punjab: Aam Aadmi Party (AAP) leader Lucky Oberoi was shot dead outside a Gurdwara in Model Town, Jalandhar; probe underway. Visuals from the spot.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 6, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7)#Punjab #Jalandhar pic.twitter.com/laqDgjTU90
जांच
पत्नी लड़ चुकी हैं AAP के टिकट पर पार्षद का चुनाव
रिपोर्ट के मुताबिक, थियारा के करीबी बताए जा रहे लकी की पत्नी सिमरजोत कौर ने दिसंबर 2024 में AAP के टिकट पर इसी क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। बताया जा रहा है कि घटना के समय गुरुद्वारा परिसर में आनंद कारज समारोह समेत 2 समारोह चल रहे थे। इसलिए गोलियां चलने पर लोगों को शादी के मेहमानों द्वारा आतिशबाजी चलाने की आशंका हुई और कोई घबराया नहीं। पुलिस जांच कर रही है।
कारण
हत्या के कारणों का पता नहीं चला
पुलिस का कहना है कि हमलावरों ने हत्या से पहले रेकी की थी। हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी का पता चला है, लेकिन जबरन वसूली का कोई पहलू सामने नहीं आया है। पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने घटना को लेकर AAP की भगवंत मान सरकार को घेरा है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अगर सत्ताधारी पार्टी के नेता भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बची है?