संसद का मानसून सत्र: 12 विधेयक पारित, केवल एक पर चर्चा; 15 घंटे ही चली लोकसभा
क्या है खबर?
संसद का मानसून सत्र आज खत्म हो गया है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आज शुरू होने की कुछ ही देर बाद स्थगित कर दी गई। इसके बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद का ये पूरा सत्र हंगामेदार रहा। राम मंदिर दान विवाद, NEET पेपर लीक और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर खूब विवाद हुआ। आइए जानते हैं सत्र में कितना कामकाज हुआ।
विधेयक
12 विधेयक पर कुल 64 मिनट हुई चर्चा
संसद में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक पारित हुए।
लोकसभा में इन सभी विधेयकों पर केवल 1 घंटे 4 मिनट चर्चा हुई।
लोकसभा
लोकसभा में निर्धारित समय के केवल 19 प्रतिशत में हुआ काम
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान लोकसभा अपने तय समय के सिर्फ 19 प्रतिशत और राज्यसभा सिर्फ 39 प्रतिशत समय तक ही काम कर पाई। लोकसभा में केवल एक ही विधेयक पर चर्चा हो सकी।
उत्पादकता के लिहाज से ये सबसे कम आंकड़ों में से एक है।
हालांकि, 2010 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा अपने तय समय के सिर्फ 5 प्रतिशत और राज्यसभा सिर्फ 2 प्रतिशत समय तक ही काम कर पाई थी।
आंकड़े
लोकसभा में औसतन 5 मिनट में पारित हुआ एक विधेयक
लोकसभा में एक विधेयक पर औसतन 5 मिनट ही चर्चा हो सकी।
लोकसभा में प्रश्नकाल करीब 20 मिनट चला। यानी विपक्षी सांसदों को सरकार से सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिला।
18 दिन के मानसून सत्र में लोकसभा केवल 15 घंटे ही चली। इनमें से 12 दिन ऐसे रहे, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हंगामे के कारण कोई काम नहीं हो सका।
कई अहम विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो गए।
खर्च
संसद चलाने में हर मिनट खर्च होते हैं 2.5 लाख रुपये
संसद के दोनों सदनों को चलाने की लागत बहुत खर्चीली होती है। पूर्व संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने 2012 में बताया था कि संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही चलाने पर हर मिनट लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं।
इस हिसाब से संसद के दोनों सदनों पर हर घंटे करीब 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। यानी संसद न चलने से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
नाराजगी
संसदीय कार्य मंत्री ने जताई नाराजगी
रिजिजू ने कहा, "हंगामा करते हुए भी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। विपक्ष पहले बातचीत में शामिल होता था। अब ये लोग विपक्ष की भूमिका निभाते हुए भी चर्चा से भागते हैं। हम चर्चा की गुणवत्ता से खुश नहीं हैं क्योंकि विपक्ष ने ठीक से बहस नहीं होने दी, खासकर लोकसभा में। मैंने पहली बार देखा कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है। सरकार खुद चर्चा चाहती थी, जबकि विपक्ष उससे बचने के लिए बहाने बना रहा था।"