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केरल अब हुआ 'केरलम', लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच नाम बदलने का विधेयक पारित
लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच केरल का नाम 'केरलम' करने का विधेयक पास

केरल अब हुआ 'केरलम', लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच नाम बदलने का विधेयक पारित

लेखन गजेंद्र
Aug 11, 2026
04:36 pm

क्या है खबर?

संसद के मानसून सत्र में लगातार गतिरोध बना हुआ है। मंगलवार को भी विपक्ष के भारी हंगामे के बीच राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर स्थगित हुई। हालांकि, इस बीच लोकसभा में 2 प्रमुख विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिसमें एक केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 भी शामिल था। इसके बाद सदन की कार्यवाही को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

हंगामा

लोकसभा में केरल का नाम बदलने का विधेयक बिना चर्चा के पारित

लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होने के बाद दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दोपहर 2 बजे कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्ष शाह के सदन में आकर बयान देने की मांग करता रहा।

इस बीच, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश किया।

हालांकि, हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी और इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

ट्विटर पोस्ट

केरल नाम बदलने का विधेयक पास

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विधेयक

किरेन रिजिजू बोले- केरल से कांग्रेस सांसद भी नहीं कर पाए चर्चा

विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल से वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल को विधेयक पर अपना मत रखने का अवसर नहीं मिला।

राय ने विधेयक पर कहा कि केरल विधानसभा ने 2024 में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से राज्य का नाम केरलम करने का अनुरोध किया था, क्योंकि मलयालम में राज्य का नाम केरलम है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पारित किया गया।

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प्रस्ताव

कब से आधिकारिक तौर पर लागू होगा नाम?

केरल का नाम 'केरलम' करने में अभी 2 औपचारिकता बाकी है। विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद बुधवार को राज्यसभा में पेश होगा, जहां इसके कल पारित होने की संभावना है।

इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सरकारी गजट में अधिसूचना जारी होगी और निर्धारित तारीख से केरल राज्य 'केरलम' हो जाएगा।

यह सिर्फ सामान्य प्रशासनिक नाम बदलना नहीं बल्कि संविधान की अनुसूची में भी केरल की जगह 'केरलम' होगा।

विधेयक

जून 2024 से लंबित था प्रस्ताव

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राज्य का नाम बदलकर प्रथम अनुसूची में 'केरलम' करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था, जिसे जून 2024 में पारित किया गया।

उनका कहना था कि 'केरलम' मलयालम में उपयोग होता है और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए यह मांग प्रमुख रही है।

यह प्रस्ताव 2023 में भी आया था, लेकिन तब तकनीकी कारणों से स्थगित हो गया था।

प्रस्ताव

केंद्रीय कैबिनेट ने फरवरी में लगाई थी मुहर

केंद्र सरकार ने फरवरी में केरल नाम बदलने के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी दे दी थी, जिसके बाद इसे संसद में लाया गया।

फरवरी में प्रधानमंत्री के नए कार्यालय 'सेवा तीर्थ' में हुई पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ही नाम बदलने का प्रस्ताव पास कर दिया गया था।

तब यह कयास लगाए जा रहे थे बजट सत्र के दूसरे चरण में इसे पास कर दिया जाएगा, लेकिन कई कारणों से यह पेश नहीं हुआ।

जानकारी

अब तक कितने राज्यों के नाम बदले?

वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर नया पहाड़ी राज्य उत्तरांचल बना, लेकिन 2007 में आधिकारिक रूप से उत्तराखंड कर दिया गया। उड़ीसा का नाम 2011 में बदलकर ओडिशा कर दिया गया। मद्रास राज्य 1969 में तमिलनाडु और मैसूर राज्य 1973 में कर्नाटक बना।

अर्थ

केरल नाम का क्या है अर्थ?

केरल नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सिद्धांत देखने को मिलते हैं।

सबसे प्राचीन संदर्भ अशोक के 257 ईसा पूर्व में द्वितीय शिलालेख में मिलता है। इसमें केरलपुत्र (केरल का पुत्र) का उल्लेख है।

इसे चेरा राजवंश के संदर्भ में कहा जाता है। कुछ विद्वान केरलम शब्द को चेरम से जोड़ते हैं, जो कन्नड़ रूप है।

मूल शब्द "चेर" का अर्थ "जोड़ना" से निकालते हैं और यह "चेरालम" शब्द में आता है, जिसमें "अलम" भूमि या क्षेत्र होता है।

जानकारी

पश्चिम बंगाल के नाम बदलने पर रही आपत्ति

केरल से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2018 में राज्य का नाम सिर्फ 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव दे चुकी हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय ने 'बांग्लादेश' से इसकी समानता को लेकर चिंता जताई, जिसके बाद इसे पारित नहीं किया गया था।

हंगामा

संसद के बाहर हंगामा

मंगलवार को संसद के अंदर ही नहीं बल्कि संसद परिसर में भी जोरदार हंगामा देखने को मिला।

परिसर में विपक्ष शाह से दिल्ली में छात्रों पर चलाई गई पैलेट गन को लेकर जवाब देने की मांग कर रहे थे, तभी सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी झारखंड मुद्दे को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

केंद्र सरकार ने शाह के सदन में आकर चर्चा की बात कही है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सिर्फ पैलेट गन पर जवाब मांगा है।

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