मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में पेश किया पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली का प्रस्ताव
क्या है खबर?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया है। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार को उसके उन आश्वासनों और वादों की याद दिलाई जो संसद, सुप्रीम कोर्ट और अन्य सार्वजनिक मंचों पर देश की जनता से किए गए थे। उमर ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादे को अब पूरा करने का समय आ गया है।
बयान
उमर ने विधानसभा में क्या कहा?
मुख्यमंत्री उमर ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "हमसे संसद में, सुप्रीम कोर्ट में और अन्य मंचों पर 3 चरणों का वादा किया गया था। इनमें परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा शामिल है। भारी मतदान हुआ। लोगों को मजबूर नहीं किया गया था, लोगों ने तीसरे चरण के लिए मतदान किया। हम प्रतीक्षा करते रहे। हमने सरकार को याद दिलाया कि वह वादे को याद रखे।"
हवाला
उमर ने प्रधानमंत्री मोदी के वादे का भी दिया हवाला
उमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस वादे से जुड़े होने का भी हवाला देते हुए कहा कि केंद्र को अब अपने वादे पर अमल करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हमने इस सदन के माध्यम से यह याद दिलाना चाहा है कि आपके वादे पर कुछ अमल होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस वादे को अपने नाम से जोड़ा था- मोदी का वादा।"
यह मांग उमर द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने की बार-बार की गई अपीलों के बाद आई है।
पृष्ठभूमि
क्या है पूर्ण राज्य के दर्ज का पूरा मामला?
जून 2026 में उमर ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की थी।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी विधानसभा से ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया गया था।
विधानसभा की इस कार्यवाही के दौरान कांग्रेस और माकपा (CPI-M) के विधायकों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में विसंगतियों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी भी की।