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अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किया
अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किया

अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किया

लेखन गजेंद्र
Apr 28, 2026
12:51 pm

क्या है खबर?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किया है। सिसोदिया ने न्यायमूर्ति शर्मा को लिखे पत्र में कहा कि वह उनके समक्ष चल रहे शराब नीति मामले की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे और न ही आगे बहस करेंगे। उन्होंने लिखा कि न्यायमूर्ति शर्मा की निष्पक्षता को लेकर उनके संदेह अभी भी अनसुलझे हैं।

पत्र

सिसोदिया ने पत्र में क्या लिखा?

सिसोदिया ने अपने पत्र में लिखा, "न्यायमूर्ति शर्मा की अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) के कार्यक्रमों में बार-बार सार्वजनिक उपस्थिति, उनके बच्चों का केंद्रीय सरकारी पैनल के साथ पेशेवर जुड़ाव और उनके खिलाफ पेश होने वाले सरकारी कानून अधिकारियों के साथ उनकी निकटता उन्हें बहुत परेशान करती है।" उन्होंने पूछा कि क्या न्यायाधीश का यह कर्तव्य नहीं था कि वह अपने बच्चों के केंद्र सरकार के साथ जुड़ाव की परिस्थितियों का खुलासा करे?

पत्र

मैं ऐसा नहीं कर सकता- सिसोदिया

सिसोदिया ने पत्र में लिखा, "केजरीवाल की तरह मेरी चिंता भी न्यायालय के प्रति शत्रुता से उत्पन्न नहीं हुई है। इसलिए मेरे समक्ष प्रश्न सीधा सा है: क्या मैं निष्पक्ष न्याय की छवि को लेकर गंभीर आशंका रखते हुए ईमानदारी से इन कार्यवाही में भाग लेना जारी रख सकता हूं? बहुत विचार-विमर्श के बाद, मेरा उत्तर केजरीवाल के उत्तर के समान है। मैं ऐसा नहीं कर सकता।" बता दें, सोमवार को केजरीवाल ने मामले पर वीडियो संदेश जारी किया था।

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घटना

क्या है मामला?

दिल्ली की निचली अदालत ने 27 फरवरी को शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत 22 अन्य आरोपियों को बरी किया था और CBI अधिकारी को फटकार लगाई थी। CBI ने आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति शर्मा ने की। उन्होंने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। उसके बाद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को मामले से अलग करने की याचिका दायर की, जिसपर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति शर्मा ने याचिका खारिज कर दी।

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