ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बुधवार को एक वी़डियो जारी कर कहा कि यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है, चुनाव आयुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही, उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर एकजुट है।
बयान
ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए- ममता
ममता ने कहा, "यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है। हमने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा। इस चुनाव आयुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और भाजपा को यह समझना चाहिए कि वे हमारे संविधान और लोकतंत्र को खत्म नहीं कर सकते।"
ममता ने कहा, "हमने जो पहले कहा था, वह अब सच साबित हो गया है...ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है।"
बयान
हमारा चुनाव वापस करो- ममता
ममता ने आगे कहा, "भाजपा और ज्ञानेश कुमार एक संयुक्त उद्यम कंपनी हैं। उन्होंने मिलकर बंगाल चुनाव लूटा है। अगर आपमें थोड़ी भी नैतिक शक्ति है, तो हमारा चुनाव वापस कीजिए।"
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में बस इसी बात पर चर्चा हो रही है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव से 7-8 महीने पहले पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चिंता जाहिर की थी।
चुनाव
बंगाल चुनाव में बुरी तरह हारी थी तृणमूल कांग्रेस
बंगाल में कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षीय शासन को समाप्त करके भाजपा ने पहली बार सत्ता हासिल की है।
यहां 4 मई को घोषित 293 सीटों के परिणामों में से भाजपा ने 207 सीट जीतकर 147 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि TMC को 80 सीटें मिलीं।
TMC और ममता बनर्जी तभी से भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत और SIR के जरिए धांधली का आरोप लगा रही है।
रिपोर्ट
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या है?
इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को खुलासा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार ज्ञानेश कुमार के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें अनसुना किया गया।
दोनों चुनाव आयुक्त नए मतदाताओं के पंजीयन, मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना और जोड़ना और SIR प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोड़ने के आदेशों के खिलाफ अपील करने के मुद्दे पर असहमत थे।
इससे ज्ञानेश कुमार की मनमानी सामने आई है।