राज्यसभा में CPIM सांसद जॉन ब्रिटास को भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने 'लुंगीवाला' कहा, विशेषाधिकार नोटिस
क्या है खबर?
संसद के मानसून सत्र को समाप्त होने में अब एक दिन शेष है, लेकिन दोनों ही सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में गतिरोध बना हुआ है। बुधवार को लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन चलाने की अपील की। हालांकि, कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) सांसद जॉन ब्रिटास को भाजपा सांसद सुष्मिता देव द्वारा 'लुंगीवाला' कहे जाने पर हंगामा हुआ, जिसके कारण कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित हुई।
हंगामा
सांसद जॉन ब्रिटास ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया
केरल से सांसद ब्रिटास ने सदन में सभापति की अनुमति से मामला उठाते हुए कहा कि कुछ दिन पहले जब वह सदन में बोल रहे थे, तब उनके लिए 'लुंगीवाला' जैसी अपमानजनक टिप्पणी की गई।
उन्होंने भाजपा सांसद देव पर आरोप लगाते हुए कहा कि धोती उनके पहनावे और संस्कृति का हिस्सा हैं। लेकिन इस तरह की रूढ़िवादी बातें अपमानजनक तरीके से कही जाती हैं, जो स्वीकार्य नहीं हैं।
उन्होंने देव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।
बयान
राज्यसभा ने टिप्पणी पर नाराजगी जताई, देव ने सफाई दी
ब्रिटास के बयान पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने दोनों सदस्यों को अपने चैंबर में बुलाया।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और सदन के नेता जेपी नड्डा ने इस तरह के बयान से असहमति जताई और ब्रिटास के बयान के बाद देव की बात भी सुनने की अपील की।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर हाल में भाजपा में आई देव ने अपना पक्ष रखा।
बयान
देव ने क्या कहा?
देव ने कहा कि सदन से ये संदेश नहीं जाना चाहिए की सदन का कोई सदस्य भाषा या संस्कृति के आधार पर भेदभाव चाहता है।
उन्होंने खुद को असम की बंगाली बताते हुए कहा कि उन्होंने पूर्वोत्तर में भिन्न-भिन्न प्रदेश देखे हैं, जहां लोगों का पहनावा और खान-पान अलग-अलग है।
उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटास का कोई दृष्टिकोण है तो उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करने को तैयार हैं और केरलम से प्यार करती हैं।
सदन
लोकसभा में बिरला बोले- देश सदन चलते देखना चाहता है
बिरला ने सदन की कार्यवाही की शुरूआत करते हुए कहा, "मेरा आप सबसे अनुरोध रहता है कि सदन चले। मतभेद हमारे हो सकते है, नीतियों और विचारों में मतभेद हो सकता है लेकिन देश सदन चलते हुए देखना चाहता है। देश के लोगों का मत है कि नीतियों और विचारों में मतभेद हो लेकिन वो विचारों में अभिव्यक्त होना चाहिए।"
बिरला ने कहा कि सरकार ने सहमति दे दी और गृह मंत्री अमित शाह अपना वकतव्य देने को तैयार हैं।