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केरलम: आलाकमान की पंसद थे केसी वेणुगोपाल, फिर वीडी सतीशन ने कैसे मारी बाजी?
केरलम मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल प्रमुख दावेदार थे

केरलम: आलाकमान की पंसद थे केसी वेणुगोपाल, फिर वीडी सतीशन ने कैसे मारी बाजी?

लेखन आबिद खान
May 14, 2026
04:38 pm

क्या है खबर?

कांग्रेस ने 10 दिन तक चले मंथन के बाद केरलम के नए मुख्यमंत्री के तौर पर वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। वे 18 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। राज्य के शीर्ष पद की दौड़ में उनके साथ संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी थे। वेणुगोपाल को राहुल गांधी समेत कांग्रेस आलाकमान की पसंद बताया जा रहा था। इसके बावजूद सतीशन को चुना गया है। आइए जानते हैं सतीशन कैसे आगे निकले।

वेणुगोपाल

सब मोर्चों पर आगे चल रहे थे वेणुगोपाल 

पहले मुख्यमंत्री पद के लिए वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे थे। वे लगभग सभी पैमानों पर खरे उतरते प्रतीत हो रहे थे। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद पोस्टरों में उन्हें 'नायक' के रूप में सराहा गया था। कांग्रेस के 63 में से 47 विधायकों ने भी वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लगाई थी। केंद्र एवं राज्य स्तर पर मंत्री रह चुके वेणुगोपाल अनुभव होने के चलते भी रेस में आगे चल रहे थे।

वजह

क्यों चुने गए सतीशन?

सतीशन को चुने जाने की कई वजहें सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी वजह उनके पीछे पार्टी कार्यकर्ताओं की लामबंदी है। कांग्रेस नेतृत्व भले ही वेणुगोपाल का समर्थन कर रहा था, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता सतीशन के पीछे खड़े थे। अगर वेणुगोपाल चुने जाते तो आलाकमान को कार्यकर्ताओं के नाराज होने का डर था। इससे ये भी संदेश जाता कि आलाकमान ने स्थानीय कार्यकर्ताओं की पंसंद की उपेक्षा कर मुख्यमंत्री को 'थोंपा' है।

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पार्टियां

सहयोगी पार्टियों का भी सतीशन को समर्थन

सतीशन को इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का समर्थन था, जिनके पास कुल 32 विधायक हैं। अगर वेणुगोपाल के चुने जाने से नाराज तीनों पार्टियां समर्थन वापस ले लेतीं, तो कांग्रेस के पास सिर्फ 70 सीटें रह जातीं, जो बहुमत से एक कम हैं। तीनों पार्टियों में भी सबसे अहम IUML है, जिसके 22 विधायक हैं। IUML ने पहले राहुल और फिर प्रियंका गांधी के लिए वायनाड सीट खाली की थी।

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वेणुगोपाल के न चुने जाने की वजह

इस वजह से भी पिछड़ गए वेणुगोपाल

वेणुगोपाल को न चुने जाने की एक और वजह ये है कि फिलहाल वे लोकसभा सांसद हैं। अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता तो उन्हें लोकसभा सांसद का पद छोड़ना पड़ता और 6 महीने के भीतर विधानसभा उपचुनाव जीतना पड़ता। अलाप्पुझा लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होता। साथ ही वेणुगोपाल संगठन महासचिव हैं, जो अहम संगठनात्मक पद है। पार्टी को उन्हें इस पद से भी हटाना पड़ता। यानी वेणुगोपाल का चयन चुनाव की नई लहर की वजह बनता।

अन्य बातें

सतीशन के पक्ष में रही ये बातें

सतीशन ने साफ कर दिया था कि वे किसी भी हालत में वेणुगोपाल के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे। कांग्रेस नेतृत्व को डर था कि सतीशन की नाराजगी पार्टी के भीतर तोड़फोड़ कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी से सलाह मांगी थी। उन्होंने भी कार्यकर्ताओं की पंसद का सम्मान करने की बात कही थी। इसके बाद राहुल ने 2 घंटे तक चर्चा कर वेणुगोपाल को मनाया।

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