राज्यसभा चुनाव: मध्य प्रदेश से झारखंड तक कांग्रेस को कैसे लगे सियासी झटके?
क्या है खबर?
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की समस्या कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रही है। हालिया चुनाव में झारखंड में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जहां पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद उसके उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन (NDA) उम्मीदवार ने आसानी से जीत दर्ज कर ली। इससे पहले मध्य प्रदेश में तो पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का नामांकन ही खारिज हो गया। आइए कांग्रेस को लगे झटकों की कहानी समझते हैं।
झारखंड
झारखंड में क्या हुआ?
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में INDIA के पास 56 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। फिलहाल NDA के 24, INDIA के 56 और JKLM का एक विधायक है। यानी कांग्रेस के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक थे। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी से हार गए। नाथवानी को 30 जबकि, झा को केवल 19 वोट ही मिल सके।
आरोप
RJD-CPI(ML) विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आशंका
कांग्रेस का मानना है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 और CPI (ML) के 2 विधायकों ने नाथवानी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है। इंडिया टुडे से बात करते हुए कांग्रेस के सूत्र ने कहा, "बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति के कारण RJD के उम्मीदवार एडी सिंह की हार का बदला लेने के लिए गुस्से में RJD ने ऐसा किया होगा।" हालांकि, RJD और CPI(ML) ने इन आरोपों को खारिज किया है।
वजह
क्या झारखंड में सक्रिय नहीं रहा कांग्रेस आलाकमान?
कांग्रेस ने झारखंड में भूपेश बघेल और अजय शर्मा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से कहा कि बघेल 6 से 8 जून के बीच रांची में रहे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सिर्फ एक बार मिले। एक सूत्र ने कहा, "AICC महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने अपने ही ज्ञात कारणों से झारखंड राज्यसभा चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली और सक्रिय निगरानी की कमी अंततः हार का कारण बनी।"
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन ही खारिज
मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा उम्मीदवारी मतदान शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई। रिटर्निंग अधिकारी ने कथित तौर पर एक मुकदमे की जानकारी छिपाने के आरोप में उनका नामांकन पत्र ही खारिज कर दिया। कांग्रेस के लिए ये बड़ा झटका इसलिए भी था, क्योंकि नटराजन को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। वहीं, भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस के ही एक शख्स ने उन्हें नटराजन के मुकदमे की जानकारी दी थी।