सुवेंदु, हिमंत और बीरेन सिंह; कांग्रेस से भाजपा में आकर मुख्यमंत्री बने नेताओं की कहानी
क्या है खबर?
सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बन गए हैं। कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सुवेंदु ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। उनके पिता भी सियासत में रहे हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) से होते हुए वे भाजपा में आए और मुख्यमंत्री बने। आइए जानते हैं कांग्रेस के किन पुराने नेताओं को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया है।
सुवेंदु
सुवेंदु अधिकारी: कांग्रेस से शुरुआत, TMC से होते हुए भाजपा में आए
सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री थे। उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन छात्र परिषद से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। ममता बनर्जी ने 1998 में TMC की नींव रखीं, तो अधिकारी TMC से जुड़ गए। यहां नंदीग्राम आंदोलन से सुवेंदु को लोकप्रियता मिली। एक वक्त पर वे ममता के बाद पार्टी में दूसरे नंबर के नेता थे। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने TMC छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।
हिमंता
हिमंत सरमा: कांग्रेस के रणनीतिकार ने बनवाई पूर्वोत्तर में पहली भाजपा सरकार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कभी राज्य में कांग्रेस का अहम चेहरा और रणनीतिकार थे। तरुण गोगोई के साथ कथित मतभेदों के चलते 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा के साथ हो लिए। 2016 के विधानसभा चुनावों में पूर्वोत्तर में पहली बार भाजपा की सरकार बनी और सरमा को मंत्री बनाया गया। 10 मई, 2021 को सरमा पहली बार असम के मुख्यमंत्री बने। उनके पार्टी छोड़ने से राज्य में कांग्रेस का लगभग पतन हो गया।
पेमा खांडु
कांग्रेसी रहते हुए भी मुख्यमंत्री रहे पेमा खांडु
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू कभी कांग्रेस में रहते हुए इस पद पर थे। उन्होंने 2016 में मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और भाजपा की सहयोगी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल हो गए। 2019 के विधानसभा चुनाव में खांडू की पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की और वे दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी जबरदस्त जीत कर खांडू तीसरी बार मुख्यमंत्री चुने गए।
बीरेन सिंह
12 साल कांग्रेस में रहे हैं बीरेन सिंह
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का भी कांग्रेस से नाता रहा है। 2002 में DRPP से विधायक बनने के बाद बीरेन ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। वे 2007 और 2012 में भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक रहे। 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के साथ विद्रोह के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। 2017 में उन्हें मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाया गया।