पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की आयु में निधन
क्या है खबर?
पूर्व रेल मंत्री रहे मुकुल रॉय का सोमवार को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनको दिल का दौरा पड़ा था। रॉय को कोलकाता के साल्ट लेक में स्थित अपोलो हॉस्पिटल में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह कई बीमारियों से पीड़ित थे। उन्होंने सोमवार तड़के डेढ़ बजे अंतिम सांस ली। रॉय तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
निधन
कभी TMC में नंबर 2 के नेता थे रॉय
TMC के जनवरी 1998 में गठन से ही रॉय पार्टी से जुड़ गई थे। वे कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे और पार्टी में उनकी हैसियत बनर्जी के बाद नंबर 2 के नेता की थी। उनको कभी 'बंगाल की राजनीति का चाणक्य' कहा जाता था। वे बंगाल और दिल्ली दोनों में पार्टी के लिए एक प्रभावशाली कार्यकर्ता थे। तमाम घोटाले में नाम आने के बाद वे नवंबर 2017 में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए थे।
पद
बंगाल में यूथ कांग्रेस से शुरू किया था राजनीतिक जीवन
रॉय के माता-पिता दोनों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कट्टर कार्यकर्ता थे, लेकिन उन्होंने अपनी राजनीतिक बंगाल में यूथ कांग्रेस से शुरू की थी। उनका जन्म जिला उत्तर 24 परगना में हुआ था। उन्होंने हरनीत हाई स्कूल, कांचरापाड़ा से स्कूली पढ़ाई, कलकत्ता विश्वविद्यालय से Bsc और तमिलनाडु की मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से 2006 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (लोक प्रशासन) विषय में स्नातकोत्तर किया था। उनकी पत्नी कृष्णा रॉय व्यवसायी थीं, जिनका निधन 2021 में हुआ था। उनके बेटे सुभ्रांशु TMC में हैं।
पद
बंगाल में TMC और भाजपा के लिए जरूरी नेता बन गए थे रॉय
TMC की स्थापना के बाद उनको पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और बाद में उनकी पकड़ दिल्ली तक हुई। वे 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009-2012 तक पार्टी के नेता बने। बंगाल में मई 2011 में जब TMC ने 34 साल के वामपंथी शासन का अंत किया, तब इसमें रॉय का अहम योगदान था। भाजपा में आने के बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 18 सीटें जीतने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।