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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और बागी गुट को नया पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह दिया
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और बागी गुट को नया पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह दिया

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और बागी गुट को नया पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह दिया

लेखन गजेंद्र
Sep 18, 2026
03:44 pm

क्या है खबर?

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके चुनाव चिन्ह पर दावे को लेकर चल रहे खींचतान के बीच अस्थायी तौर पर व्यवस्था की है। आयोग ने TMC के मौजूदा नाम और चुनाव चिन्ह को स्थिर रखते हुए ममता बनर्जी और बागी गुट को अलग-अलग अंतरिम नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता के नेतृत्व वाले गुट को आयोग ने 'ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है और चुनाव चिन्ह 'फुटबॉल खिलाड़ी' तय किया है।

फैसला

बागी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम दिया गया

आयोग ने ममता के बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया है। उसका चुनाव चिन्ह 'लिफाफा' तय किया गया है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये चिन्ह अस्थायी हैं और आगामी उपचुनाव में लागू होंगे।

चुनाव आयोग ने 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और उसके पारंपरिक 'फूल और घास' चिन्ह को अस्थायी रूप से निलंबित करने के एक दिन बाद नई पहचान आवंटित की है।

टकराव

अक्टूबर में होने वाले उपचुनाव में नहीं दिखेगा फूल और घास चुनाव चिन्ह

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक 3 पसंदीदा नाम और 3 स्वतंत्र चुनाव चिन्ह जमा करने का निर्देश दिया गया था।

इसके बाद आयोग ने आगामी उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को उनके अंतरिम चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं।

आयोग ने नया चुनाव चिन्ह आवंटित करने से पहले 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल उपचुनाव के मतपत्रों से दोनों गुटो को अस्थायी रूप से हटा दिया था।

चुनाव में फूल-घास चुनाव चिन्ह नहीं दिखेगा।

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पार्टी

TMC में विद्रोह का दायरा बढ़ा

बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद अंदरूनी टकराव बाहर आ गया और विद्रोह का दायरा बढ़कर पार्टी की टूट तक पहुंच गया।

जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय के स्थान पर निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता प्राप्त कर ली।

इसके बाद पार्टी के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया। यह विद्रोह संसद पहुंचा, जहां 20 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी।

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झटका

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले भी झटका

शुक्रवार को ममता बनर्जी को सिर्फ पार्टी के चुनाव चिन्ह और नाम को लेकर ही झटका नहीं सहना पड़ा, बल्कि नंदीग्राम उपचुनाव की उनकी तैयारियां भी अधर में लटक गई।

दरअसल, ममता ने जिस उम्मीदवार संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम उपचुनाव में उतारा था, उन्होंने शुक्रवार को अचानक अपना नाम वापस ले लिया।

संचिता ने यह फैसला राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद लिया। इससे राजनीतिक चर्चा का माहौल गर्म हो गया।

बयान

ममता अब नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन देंगी

संचिता के नाम वापसी के बाद ममता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि नंदीग्राम उपचुनाव में वह कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अपना समर्थन देंगी।

ममता ने कहा कि उनका खेमा नंदीग्राम से कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगा और उन्होंने इस फैसले को भाजपा के खिलाफ लड़ाई में INDIA गठबंधन के साथ एकजुटता दिखाने के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा, "हम डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। मैं चाहती हूं कि भाजपा भारत से चली जाए।"

बयान

ममता ने भाजपा और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया

पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने भाजपा और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी पूरी पार्टी हड़प ली है।

उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के फैसले को "अवैध" करार दिया।

उन्होंने कहा कि वह हार नहीं मानेंगी और इस आदेश के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा झूठी और जुमलाबाज पार्टी है, जो कभी उनकी पार्टी को मिटा नहीं सकती।

निशाना

राहुल गांधी ने भी चुनाव चिन्ह को लेकर आपत्ति जताई

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी TMC के चुनाव चिन्ह को लेकर आपत्ति जताई है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।'

उन्होंने लिखा कि जब पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना कोई हैरानी की बात नहीं है।

इतिहास

ममता ने स्थापना के दौरान खुद से बनाया था पार्टी का चुनाव चिन्ह

ममता कांग्रेस में करीब 26 साल रहीं और 1990 के दशक में बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा सहित आलाकमान से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया।

ममता को दिसंबर 1997 में पार्टी-विरोधी गतिविधियों के कारण कांग्रेस से निष्कासित किया गया और 1 जनवरी, 1998 को उन्होंने आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस बनाई।

कहा जाता है कि ममता ने पार्टी के स्थापना के दिन खुद से पार्टी का चुनाव चिन्ह 2 फूल और घास का स्केच बनाया था।

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