
द्रौपदी मुर्मू: कॉलेज के समय हुआ प्यार, शादी के लिए घर वालों को मुश्किल से मनाया
क्या है खबर?
64 वर्षीया द्रौपदी मुर्मू देश की नई राष्ट्रपति चुनी गई हैं। 25 जुलाई को वह महामहिम के रूप में शपथ लेंगी। उन्होंने चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पटखनी दी है।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि द्रौपदी की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्हें कॉलेज के दिनों में प्यार हुआ और फिर शादी के लिए परिवार वालों को मनाना पड़ा।
आइए जानते हैं उनकी प्रेम कहानी।
रिपोर्ट
द्रौपदी का पति श्याम से हुआ था प्रेम विवाह
द्रौपदी का उनके पति श्याम चरण मुर्मू से प्रेम विवाह हुआ था।
श्याम के मुंह-बोले चाचा लक्ष्मण बासी उनका रिश्ता लेकर द्रौपदी के घर गए थे।
दरअसल, आदिवासियों में यह पंरपरा है कि लड़के वाले लड़की वालों के यहां रिश्ता लेकर जाते हैं।
दैनिक भास्कर के मुताबिक उन्होंने कहा, "प्रेम विवाह था दोनों का। द्रौपदी के घर जाने से एक हफ्ता पहले श्याम ने मुझे बताया था कि उन्हें प्रेम हुआ है। यह करीब 42 साल पुरानी बात है।"
प्यार
कॉलेज के दिनों में चढ़ा दोनों का प्यार परवान
द्रौपदी पढ़ाई में अव्वल थीं और वह अपने गांव उपरवाड़ा से भुवनेश्वर जाकर पढ़ने वाली इकलौती लड़की थीं।
उन्होंने 1969 से 1973 तक आदिवासी आवासीय विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद ग्रेजुएशन करने के लिए उन्होंने भुवनेश्वर के रामा देवी वुमंस कॉलेज में दाखिला लिया।
यहीं पर उनकी मुलाकात उनके पति श्याम से हुई। जब दोनों में नजदीकियां बढ़ीं, तो श्याम 1980 में द्रौपदी के घर शादी का प्रस्ताव लेकर पहुंच गए।
नाराजगी
द्रौपदी की शादी के खिलाफ थे उनके पिता
द्रौपदी और श्याम का रिश्ता द्रौपदी के पिता बिरंची नारायण टुडू को मंजूर नहीं था।
द्रौपदी की भाभी शाक्यमुनि ने बताया, "मुझे सास ने बताया था कि पिताजी यानी बिरंची नारायण द्रौपदी से गुस्सा हो गए। वह इस रिश्ते से खुश नहीं थे, लेकिन श्याम भी ठानकर आए थे कि द्रौपदी से संबंध पक्का करके ही जाएंगे। श्याम अपने गांव के रिश्ते के चाचा लक्ष्मण बासी, अपने सगे चाचा और गांव के लोगों को लेकर यहां पहुंचे थे।"
मान-मनौव्वल
द्रौपदी के गांव में श्याम ने तीन-चार दिनों तक डाल दिया था डेरा
रिपोर्ट की मानें तो श्याम ने द्रौपदी के पिता बिरंची नारायण को राजी करने के लिए गांव में तीन-चार दिनों के लिए डेरा डाल लिया था। द्रौपदी ने भी ठान ली थी कि शादी करेंगी तो सिर्फ श्याम से ही।
फिर काफी मान-मनौव्वल के बाद द्रौपदी के पिता राजी हो गए।
दोनों की शादी 1980 में हुई थी। हालांकि, शादी की तारीख किसी को पता नहीं है। शादी के बाद द्रौपदी टुडू ने अपने पति श्याम का सरनेम मुर्मू लगाया।
दहेज
द्रौपदी को दहेज मिली एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े
द्रौपदी की शादी के दहेज का वाकया रोचक है। द्रौपदी को दहेज में एक गाय, एक बैल और 16 जोड़ी कपड़े मिले।
द्रौपदी की चाची जमुना टुडू ने बताया, "दहेज में तय हुआ एक गाय, बैल और 16 जोड़ी कपड़े। द्रौपदी के घर वाले इतने पर राजी हो गए थे।"
द्रौपदी संथाल समाज से आती हैं और इस समाज में लड़के वाले लड़की वालों को दहेज देते हैं। उनकी शादी की दावत में लाल-पीले देसी मुर्गे का भोज हुआ था।
जानकारी
द्रौपदी ने ससुराल में पति के नाम से खुलवाया स्कूल
द्रौपदी अपने पति श्याम को बेहद प्यार करती थीं। उनका ससुराल पहाड़पुर गांव में है। इसी गांव में उन्होंने अपने पति के नाम से स्कूल खुलवाया था। उन्होंने 2016 में अपने घर को ही स्कूल में तब्दील कर दिया था।
न्यूजबाइट्स प्लस
पति और दो बेटों की असमय मौत से टूट गई थीं द्रौपदी
द्रौपदी का निजी जीवन बेहद संघर्षों से भरा रहा है। कम उम्र में ही उनके पति श्याम का निधन हो गया था। दोनों की तीन संतानें थीं, लेकिन इनमें से भी दो बेटों का असमय निधन हो गया।
अभी द्रौपदी की केवल एक बेटी है।
2009 के हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई कार नहीं थी और कुल जमापूंजी नौ लाख रुपये थी। उन पर चार लाख रुपये कर्ज भी था।