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कांग्रेस के पूर्व सांसद और सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन
कांग्रेस के पूर्व सांसद और सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन

कांग्रेस के पूर्व सांसद और सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन

लेखन गजेंद्र
Aug 20, 2026
01:55 pm

क्या है खबर?

दिल्ली में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दोषी कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कुमार को सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। कुमार को सिख दंगों के 4 में 2 मामलों में दोषी ठहराया गया था और 2 मामले में बरी थे।

पहचान

कौन थे सज्जन कुमार?

सज्जन का जन्म ब्रिटिश भारत में हुआ था।

उन्होंने 1977 में दिल्ली में पार्षद का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1980 में वे कांग्रेस के टिकट पर पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे।

उन्होंने 1991 और 2004 में फिर लोकसभा चुनाव जीता। 2004 में रिकॉर्ड 8.55 लाख वोटों से चुनाव जीते थे।

दिसंबर, 2018 में सिख दंगों से जुड़े एक मामले में सजा होने के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

दोषी

5 सिखों की हत्या मामले में दोषी थे सज्जन

सिख दगों के दौरान ही दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में भीड़ ने 5 सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी थी और गुरुद्वारा जला दिया था।

इस मामले में 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन को दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हालांकि, कुमार को निचली अदालत ने 2013 में बरी कर दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने पलट दिया था।

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सजा

फरवरी 2025 में सरस्वती विहार मामले में भी मिली थी उम्रकैद

इसके बाद, दंगों के दौरान दिल्ली के सरस्वती विहार में पिता-पुत्र सिखों को जिंदा जलाने के मामले में भी कुमार को दोषी ठहराया गया था।

यहां 1 नवंबर, 1984 को भीड़ ने जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया था। आरोप था कि हिंसक भीड़ का नेतृत्व कुमार ने किया था।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी 2025 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड मांगा, लेकिन उम्र को देखते हुए कोर्ट ने मृत्युदंड नहीं दिया।

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बरी

इन 2 मामलों में बरी हुए थे कुमार

कुमार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या मामले में सितंबर, 2023 में बरी कर दिया था।

दंगे में CBI की गवाह चाम कौर ने आरोप लगाया था कि सज्जन भीड़ को भड़का रहे थे। फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

22 जनवरी, 2026 को कोर्ट ने जनकपुरी में सोहन सिंह, उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या और विकासपुरी में गुरचरण सिंह को जलाने के मामले में बरी किया था।

दंगा

कैसे भड़की 1984 में हिंसा?

दरअसल, 1970 के दशक में खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 5 जून, 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत सेना को स्वर्ण मंदिर में भेजकर भिंडरावाले और उसके समर्थकों को मार गिराया।

इससे नाराज इंदिरा के सिख अंगरक्षकों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी हत्या कर दी थी, जिससे देशभर में दंगे भड़क उठे।

देशभर में 2,733 की जान गई, जिसमें दिल्ली के 2,433 शामिल हैं।

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