प्रधानमंत्री मोदी के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' पर विवाद, कांग्रेस ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' पर विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 18 अप्रैल, 2026 को संबोधन में लोकसभा के सदस्यों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वेणुगोपाल ने कहा कि संबोधन में विपक्ष के इरादों पर सवाल उठाना सदन अवमानना का गंभीर मामला है।
अवमानना
अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग
कांग्रेस सांसद ने स्पीकर को दिए पत्र में लिखा, "मैं लोकसभा के नियमों के तहत प्रिविलेज के सवाल का नोटिस दे रहा हूं, क्योंकि प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल को अपने भाषण में लोकसभा सदस्यों पर गलत टिप्पणी की थी।" उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने भाषण में बिल रोकने के लिए विपक्षी सदस्यों के वोटिंग पैटर्न पर सीधा सवाल उठाया और उनके पीछे के मकसद बताए, जो पहले कभी नहीं हुआ। वेणुगोपाल ने इसे अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग बताया।
पत्र
प्रधानमंत्री ने सांसदों की आजादी और संसद के कामकाज पर उठाया सवाल- वेणुगोपाल
कांग्रेस सांसद ने पत्र में कहा कि लोकसभा में विपक्ष संविधान संशोधन का विरोध कर रहा था और महिला आरक्षण को पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने लिखा कि यह बात साबित हो चुकी है कि संसद में दिए भाषणों के बारे में सांसद पर सवाल उठाना, उनपर आरोप लगाना, इरादों पर सवाल उठाना विशेषाधिकार का बड़ा उल्लंघन और सदन की बेइज्जती के बराबर है। इसलिए प्रधानमंत्री की ये बातें, सांसदों की आज़ादी-ईमानदारी और संसद के कामकाज पर सवाल उठाती है।
मांग
कांग्रेस ने रखी मांग
वेणुगोपाल ने लिखा कि प्रधानमंत्री का भाषण आचार संहिता के अलावा, विपक्ष के हर सदस्य के विशेषाधिकार का साफ और गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने इसे गंभीर घटना बताते हुए जानबूझकर विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना मानकर संज्ञान लेने, लोकसभा की प्रिविलेज कमिटी के पास भेजने की मांग की, ताकि प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाए ताकि उल्लंघन को नजरअंदाज और दोहराया न जा सके।
विवाद
क्या है मामला?
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े 3 विधेयकों को पास कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था, जिस पर लंबी बहस हुई। शुक्रवार को शाम 5 बजे के बाद हुए मतदान में इसे जरूरी 2 तिहाई वोट नहीं मिल सके और यह प्रस्ताव गिर गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 18 अप्रैल को रात साढ़े 8 बजे दूरदर्शन पर 'राष्ट्र के नाम संबोधन' किया, जिसमें विपक्षी सांसदों की आलोचना की थी।
विवाद
700 लोगों ने चुनाव आयोग को भी भेजा है शिकायती पत्र
प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर 700 विशेष लोगों ने भी चुनाव आयोग से शिकायत की है और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि चुनाव के बीच ऐसा संबोधन चुनाव को प्रभावित कर सकता है, जिसकी आयोग को जांच करनी चाहिए। शिकायत करने वालों में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार टीएम कृष्णा, पूर्व सचिव ईएएस शर्मा समेत अन्य शामिल हैं।