UPI भुगतान पर जल्द ही शुल्क लगाने का दरवाजा खोल रही सरकार, कांग्रेस का दावा
क्या है खबर?
कांग्रेस ने गुरुवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जल्द ही निशुल्क UPI भुगतान के लिए भी लोगों से शुल्क वसूल कर सकती है। कांग्रेस के संचार विभाग के महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 की प्रति साझा करते हुए यह बात लिखी। उन्होंने लिखा कि सरकार का विधेयक उस वैधानिक गारंटी को समाप्त करेगा, जो अब तक UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त बनाए थी।
विधेयक
सरकार के दावे को झूठ बताया
जयराम ने आगे लिखा कि यह विधेयक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खोलता है, जिसे भविष्य में आसानी से सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू किया जा सकता है।
इसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब UPI के इस्तेमाल के लिए भी भुगतान करना पड़ सकता है।
उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार का यह दावा कि UPI को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र रास्ता है, पूरी तरह गलत है।
दावा
बिना अतिरिक्त शुल्क के UPI मजबूती से चल सकती है- जयराम
उन्होंने लिखा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास यह क्षमता है कि वह UPI प्रणाली को किसी से अतिरिक्त शुल्क लिए बिना वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रख सकती है।
उन्होंने बताया कि 2025-26 में RBI ने मोदी सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया था। इस राशि का केवल छोटा-सा हिस्सा इस डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने इस संशोधन के पीछे की असली वजह को अधिक चिंताजनक बताया है।
दावा
अमेरिका के दबाव में लाया जा रहा विधेयक?
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि सरकार यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की उस रिपोर्ट के बाद उठा रही है, जिसमें UPI और RuPay के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी और आरोप था कि उन्होंने 'वीजा' और 'मास्टरकार्ड' जैसे अमेरिकी भुगतान प्लेटफॉर्मों को बाजार से बाहर किया है।
जयराम ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमजोर कर इसे अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है?
ट्विटर पोस्ट
जयराम रमेश का पोस्ट
मोदी सरकार द्वारा लाया गया टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है, जो अब तक UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त बनाए हुए थी। यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खोलता है, जिसे भविष्य में आसानी से सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू… pic.twitter.com/QoBN01Nxw2
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 6, 2026