पश्चिम बंगाल में कैसे शून्य से सत्ता तक पहुंची भाजपा? चुनाव-दर-चुनाव उदय की कहानी
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल में भाजपा इतिहास रचने की ओर है। विधानसभा चुनावी नतीजों के रुझानों में भाजपा 200 सीटों के करीब है और राज्य में पहली बार सरकार बनाती दिख रही है। जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए ये बड़ा झटका है, तो राज्य में भाजपा के उदय की दिशा में एक मील का पत्थर है। भाजपा ने यहां शून्य से सत्ता तक का सफर तय कर लिया है। आइए इसके हर पड़ाव को समझते हैं।
2006 चुनाव
2001 से 2011 तक शून्य पर रही भाजपा
2001 में भाजपा ने राज्य की 266 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। इसके बाद यानी 2006 के चुनावों में भाजपा ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था। तब भी पार्टी खाली हाथ रही। 2011 के चुनावों में जब ममता बनर्जी ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया और सत्ता में आईं, तब भी भाजपा एक सीट भी नहीं जीत पाई। तब पूरे NDA को केवल 4 सीटें मिली थीं।
उदय
2014 से हुई उदय की शुरुआत
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के उदय की शुरुआत 2014 के लोकसभा चुनाव से हुई। तब भाजपा ने करीब 17 प्रतिशत वोट और 2 सीटें जीतीं। इसके 2 साल बाद यानी 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 291 सीटों पर चुनाव लड़ा और 3 सीटें जीतीं। वोट शेयर भी बढ़कर 10.16 प्रतिशत पर पहुंच गया। पार्टी के लिए ये छोटी लेकिन अहम शुरुआत थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 सीटें जीतकर चौंका दिया।
2021 चुनाव
2021 में भाजपा बनी मुख्य विपक्षी पार्टी
2021 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए अहम सफलता लेकर आया। भाजपा ने 77 सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर तेजी से बढ़कर 37.97 प्रतिशत हो गया। इस चुनाव के बाद भाजपा राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई। TMC ने 48.02 प्रतिशत वोटों और 215 सीटों के साथ सत्ता पर कब्जा बनाए रखा, लेकिन राजनीतिक माहौल अब दो-ध्रुवीय मुकाबले में बदल चुका था। TMC के वोट बैंक में ये बड़ी सेंध थी।
2024 लोकसभा
कैसा रहा 2024 आम चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन?
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 12 सीटें जीती और लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर भी हासिल किया। ये पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले खराब प्रदर्शन था। निशिथ प्रमाणिक, अग्रिमित्रा पॉल, तपस रॉय, लॉकेट चटर्जी और दिलीप घोष जैसे उसके बड़े नेता चुनाव हार गए। हालांकि, पार्टी डटी रही और विधानसभा चुनावों में पूरी जान झोंक दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पार्टी का पूरा आलाकमान प्रचार में जुटा रहा।