
अयोध्या विवाद: भाजपा की अपने नेताओं को नसीहत, कहा- फैसले के बाद न दें भड़काऊ बयान
क्या है खबर?
भारतीय जनता पार्टी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए आचार संहिता जारी करते हुए उन्हें अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संयम बरतने और भड़काऊ भाषण देने से बचने की नसीहत दी है।
नेताओं को फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की प्रतिक्रिया से पहले कोई बयान न देने को कहा गया है।
बता दें कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले कभी भी आ सकता है।
जानकारी
भाजपा ने देश के हर क्षेत्र में की बैठक
सोमवार को भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आचार संहिता को लेकर पार्टी के महासचिवों के साथ दिल्ली में बैठक की। इसके अलावा दक्षिणी हिस्से के लिए बेंगलुरू, पूर्वी हिस्से के लिए कोलकाता और पश्चिमी हिस्से के लिए मुंबई में बैठक की गई।
नसीहत
मंत्रियों और नेताओं को करना होगा प्रधानमंत्री मोदी और शाह के बयान का इंतजार
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "फैसले के दिन नेताओं को क्या करना है और क्या नहीं, इसकी एक सूची बनाई गई है। कोई भी नेता इस पर टिप्पणी नहीं करेगा।"
उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी बयान देंगे और मंत्रियों को इसका इंतजार करना होगा, वहीं पार्टी की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सबसे पहले बयान देंगे और बाकी नेता इसी के बाद कुछ कह सकेंगे।
आचार संहिता
भाजपा नेताओं को जिम्मेदारी से व्यवहार करने का संदेश
इसके अलावा आचार संहिता के तहत हर राज्य के भाजपा नेताओं को एक कड़ी चेतावनी दी गई है क्योंकि पार्टी मामले में फैसले पर अपने नेताओं के व्यवहार के लिए आलोचना नहीं चाहती।
एक नेता ने बताया, "सभी को जिम्मेदारी से व्यवहार करने का संदेश दिया गया है क्योंकि ये एक न्यायिक मामला है और जो भी फैसला होगा वो कानूनी होगा। इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो भीड़ को संभालना है।"
चिंता का कारण
अपनी छवि को लेकर चिंतित है भाजपा का शीर्ष नेतृत्व
दरअसल, राम मंदिर आंदोलन के जरिए पहली बार सत्ता में पहुंचने वाली भाजपा की इस समय केंद्र सहित कई राज्यों में सरकार है।
फैसले के लिहाज से संवेदनशील उत्तर प्रदेश में भी उसकी सरकार है।
इसलिए शीर्ष नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित है कि अगर चीजें हाथ से बाहर जाती हैं तो इसके लिए सरकार की जबावदेही होगी और इससे देश ही नहीं बल्कि दुनिया में उसकी छवि को एक बड़ा नुकसान पहुंचेगा।
बयान
RSS भी दे चुका है खुले दिमाग से फैसला स्वीकार करने का संदेश
इन्हीं सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए भाजपा से पहले उसका पैतृक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी अपने स्वयंसेवकों से फैसले पर शांति बनाए रखने की अपील कर चुका है।
RSS ने मामले पर बयान जारी करते हुए सभी को खुले दिमाग से फैसले को स्वीकार करने को कहा है।
उसने अपने स्वयंसेवकों से हिंदू पक्ष के हित में फैसले आने पर भी विजय दिवस या उत्सव नहीं बनाने को कहा है।
जानकारी
मुस्लिम पक्ष ने भी अपनी तरफ से शांति की अपील
इसके अलावा मुस्लिम पक्ष ने भी लोगों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शांति से स्वीकार करने की अपील की है और इसके लिए मस्जिदों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस भी विभिन्न समुदायों के साथ बैठक कर रही है।
फैसला
17 अक्टूबर से पहले आएगा फैसला
बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी हो चुकी है और मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।
17 नवंबर को CJI गोगोई रिटायर होंगे और मामले पर फैसला इससे पहले सुनाया जाना है।
सुप्रीम कोर्ट 2.77 एकड़ विवादित जमीन के मालिकाना हक पर अपना फैसला सुनाएगी, जिसमें राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड मुख्य पक्ष हैं।