असम की विधानसभा में UCC विधेयक पारित, विपक्ष की मांग दरकिनार
क्या है खबर?
असम की विधानसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है। विवादित विधेयक पर 5 दिवसीय विधानसभा सत्र के अंतिम दिन चर्चा हुई थी, जिसमें विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया गया। उसने विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए इसके एक चयन समिति के पास भेजने की मांग की थी। बता दें कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला असम तीसरा राज्य है।
विधेयक
भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल था UCC
असम में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में UCC लागू करना भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल था, जिसके लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जमकर कोशिश की। विधानसभा में सरमा ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानूनों को समेकित और सरल बनाना है। कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने विधेयक को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
कानून
UCC विधेयक की प्रमुख बातें?
विधेयक लागू होने पर बहुविवाह और दूसरे विवाह पर प्रतिबंध लगेगा। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चे के अधिकारों को औपचारिक मान्यता दी जाएगी। अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी), अनुसूचित जनजाति (मैदानी) को और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों को विधेयक से बाहर रखा गया है। विधेयक में पति-पत्नी के भरण-पोषण, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है।