
दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन की संभावना को नकारा
क्या है खबर?
दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) अकेले मैदान में उतरेगी। वह कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। यह पुष्टि पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने की है।
केजरीवाल ने एक्स पर समाचार एजेंसी ANI के ट्वीट को रीट्वीट कर अंग्रेजी में लिखा, 'आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपने बलबूते पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना नहीं है।'
गठबंधन
दिल्ली में गठबंधन को लेकर पहले आई थी यह खबर
ANI ने बुधवार सुबह सूत्रों के हवाले से खबर चलाई कि दिल्ली चुनाव में गठबंधन के लिए कांग्रेस और AAP के बीच सहमति अंतिम चरण में है।
खबर के मुताबिक, AAP कांग्रेस को दिल्ली की 70 सीटों में से 15 सीटें दे रही है, जबकि INDIA गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों को 1 से 2 सीट दे सकती है।
बाकी सभी सीटों पर AAP चुनाव लड़ेगी। हालांकि, इस पर कांग्रेस का कोई बयान नहीं आया है।
रैली
कैसे सामने आई गठबंधन की संभावना?
टीवी9 का दावा है कि दिल्ली न्याय यात्रा के तहत 9 दिसंबर को तालकटोरा में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें राहुल गांधी को शामिल होना था।
राहुल के कार्यक्रम में न आने से कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
इसके एक दिन बाद 10 दिसंबर को शरद पवार के आवास पर केजरीवाल के साथ मुलाकात हुई थी।
इस बैठक के बाद संभावना जताई गई कि दिल्ली में AAP-कांग्रेस गठबंधन हो सकता है और इसलिए राहुल का कार्यक्रम रद्द हो गया।
संभावना
कांग्रेस और AAP में पक रही खिचड़ी?
दिल्ली में भले ही AAP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से इंकार कर दिया हो, लेकिन उनके नेताओं के बीच पक रही सियासी खिचड़ी का अनुमान किसी को नहीं है।
कांग्रेस ने 9 नवंबर से दिल्ली के सभी विधानसभा क्षेत्रों में न्याय यात्रा शुरू की है। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं को शामिल होना था।
यात्रा के 1 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा कांग्रेसी इसमें शामिल नहीं हुआ।
सर्वे
भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी कांग्रेस को फायदा
पिछले दिनों दिल्ली भाजपा की ओर से एक आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशित हुई है, जिसमें इस बार के दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस को फायदा होने की उम्मीद जताई गई है।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मजबूत होने से भाजपा को अधिक फायदा मिलेगा क्योंकि भाजपा के विरोध में पड़ने वाले वोट AAP और कांग्रेस के बीच बटेंगे।
इससे भाजपा को फायदा हो सकता है।
स्थिति
अभी दिल्ली में क्या है स्थिति?
दिल्ली में कांग्रेस के लगातार 15 साल शासन के बाद अरविंद केजरीवाल पिछले 10 साल से सत्ता पर काबिज हैं। भाजपा 1998 से यहां सत्ता से बाहर है।
पिछले 2 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दिल्ली में अपना खाता नहीं खोल सकी है। उसके अल्पसंख्यक और दलित वोट AAP के पाले में चले गए हैं।
ऐसे में कांग्रेस अपनी खोई जमीन पाने में जुटी है, जबकि AAP को सत्ता विरोधी लहर का डर है। भाजपा अपनी ताकत बढ़ा रही है।