कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा-इमरान मसूद को अहम जिम्मेदारियां देकर कैसे साधे समीकरण?
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव किया है। पार्टी ने रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। उन्हें अजय राय की जगह ये पद दिया गया है। साथ ही सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इन बदलावों को विधानसभा चुनावों से पहले समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आइए बदलावों की वजह जानते हैं।
परिचय
कौन हैं आराधना मिश्रा?
आराधना वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 2 विधायकों में से एक हैं। वे रामपुर खास से तीसरी बार विधायक बनी हैं।
उन्होंने रामपुर खास से पहला चुनाव 2014 उपचुनाव में जीता था। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी। वे 2019 से कांग्रेस विधायक दल की नेता भी हैं।
समीकरण
आराधना को क्यों दी गई अहम जिम्मेदारी?
आराधना को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर संदेश देने की कोशिश की है। हालिया कई विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
इसके अलावा वे ब्राह्मण समाज से आती हैं। राज्य में ब्राह्मणों की आबादी करीब 9 प्रतिशत मानी जाती है। ऐसे में कांग्रेस ने आराधना को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरे को आगे किया है।
इमरान मसूद
इमरान मसूद को क्यों मिली जगह?
मसूद की गिनती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख कांग्रेस नेताओं में होती है। उनकी पदोन्नति से संगठन को एक वरिष्ठ चेहरा मिला है, जिसका क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक आधार है।
उनकी नियुक्ति से कांग्रेस को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पहुंच मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, समाजवादी पार्टी को लेकर उनका रुख परेशानी का सबब बन सकता है, चूंकि दोनों पार्टियां गठबंधन में भूमिकाओं पर चर्चा कर रही हैं।
समाजवादी पार्टी
क्या नियुक्तियों के जरिए समाजवादी पार्टी को संदेश दिया गया है?
इन बदलावों से कांग्रेस और SP के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
लखनऊ के डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक शशिकांत पांडे ने न्यूज18 से कहा, "कांग्रेस को गठबंधन समन्वय और संगठनात्मक महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। मजबूत राज्य इकाई उसे वार्ता क्षमता प्रदान कर सकती है, लेकिन सीट बंटवारा संगठनात्मक शक्ति और चुनावी प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। तत्काल प्राथमिकता नेतृत्व स्तर की वार्ताओं के बजाय सभी सीटों पर विश्वसनीय उपस्थिति का निर्माण करना होना चाहिए।"
अन्य नियुक्तियां
दलित नेता को बनाया गया प्रभारी
कांग्रेस ने दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश प्रभारी बनाया है। यानी ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
CSDS-लोकनीति के 2024 सर्वे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 79 प्रतिशत अगड़ी जातियों ने NDA को वोट किया था। कांग्रेस की कोशिश इसी सामाजिक आधार में हिस्सेदारी बढ़ाने की है।
यह पार्टी की सामाजिक पहुंच को बढ़ाने की भी कोशिश है, जब SP भी राजनीतिक विमर्श पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्याक जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द रख रही है।