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बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कान में संक्रमण होने के मामले? जानिए बचने के तरीके
कान के संक्रमण से बचने के तरीके

बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कान में संक्रमण होने के मामले? जानिए बचने के तरीके

लेखन सयाली
Jul 07, 2026
02:39 pm

क्या है खबर?

मानसून का मौसम संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है, खासकर कान में संक्रमण होने का। संक्रमण के कारण कान में दर्द होना, कान से पानी निकलना और सुनाई देने में दिक्कत होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। इस मौसम में कान में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी क्यों देखने को मिलती है? आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में कान में संक्रमण होने का कारण और इससे बचाव के तरीके क्या हैं।

कारण

कान में संक्रमण होने का कारण

बारिश के मौसम में नमी का स्तर काफी ज्यादा होता है और इससे फफूंद पनपने लगती है। फफूंद कान के अंदरूनी हिस्सों में भी पनप सकती है। इसके अलावा पानी में रहने से भी कान में संक्रमण हो सकता है। साथ ही मानसून के दौरान नाक में संक्रमण और सर्दी-जुकाम के कारण भी कान में संक्रमण हो सकता है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो भी यह समस्या हो सकती है।

लक्षण

कान में संक्रमण के लक्षण

कान में संक्रमण होने पर कान में दर्द होना, कान से पानी निकलना, कान में खुजली होना, सुनाई देने में दिक्कत होना, कान में खिचाव महसूस होना और कान में झिंगोरे की आवाज आना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। इसके अलावा कान में हल्का-सा दबाव महसूस होना और कान में हल्की सनसनाहट होना भी कान में संक्रमण के लक्षण हैं। ऐसा होने पर रोजमर्रा के काम तक करने मुश्किल हो जाते हैं।

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इलाज

कान में संक्रमण का इलाज

कान में संक्रमण का इलाज कान के डॉक्टर द्वारा किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करवाते हैं, ताकि संक्रमण खत्म हो जाए। इसके अलावा कान में संक्रमण की समस्या से बचने के लिए कान में संक्रमण के कारणों को दूर करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए नाक में संक्रमण से बचाव के तरीके, मानसून के दौरान कान की देखभाल और अपनी कान में पानी बिलकुल भी न जाने दें।

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बचाव

कान में संक्रमण से बचाव के तरीके

मानसून के दौरान कान में संक्रमण से बचने के लिए अपने कान को साफ और सूखा रखें। इसके लिए आप रूई से अपने कान को हल्के हाथों से साफ कर सकते हैं। इसके अलावा जब आप बारिश के पानी में भीग जाएं तो कान को तुरंत सुखा लें और पानी को कान में घुसने न दें। साथ ही मानसून में तैराकी करने से बचें, क्योंकि नमी वाले पानी में फफूंद पनप सकती है।

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