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कुछ किशोर अपने माता-पिता को क्यों समझते हैं अपना दुश्मन? जानिए इसके कुछ कारण
किशोरों का माता-पिता को दुश्मन समझना

कुछ किशोर अपने माता-पिता को क्यों समझते हैं अपना दुश्मन? जानिए इसके कुछ कारण

लेखन सयाली
Oct 03, 2026
04:20 pm

क्या है खबर?

किशोरावस्था एक ऐसा समय होता है, जब बच्चे और माता-पिता के बीच टकराव बढ़ जाता है। इस दौरान बच्चे खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं और कई बार माता-पिता को अपना दुश्मन मान लेते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि क्यों किशोर इस तरह की सोच रखते हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है। यह समझना जरूरी है कि किशोरावस्था का दौर बहुत संवेदनशील होता है और इसमें सही दिशा-निर्देश देना अहम है।

#1

स्वतंत्रता की चाह

किशोरावस्था में बच्चे आजादी की चाह रखते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी राय सुनी जाए और उन्हें अपनी जिंदगी जीने का मौका मिले।

जब माता-पिता उनकी बात नहीं सुनते या उनकी इच्छाओं को नजरअंदाज करते हैं तो वे खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं और आपको अपना दुश्मन मान लेते हैं।

इस समस्या का समाधान यह हो सकता है कि आप अपने बच्चे की बात ध्यान से सुनें और उसे समझने की कोशिश करें।

#2

पहचान बनाने की कोशिश

किशोरावस्था में बच्चे अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। वे नए दोस्त बनाते हैं, अलग-अलग शौक अपनाते हैं और कभी-कभी अपने परिवार से दूरी बनाने लगते हैं, ताकि वे खुद को समझ सकें।

जब माता-पिता इस बदलाव को स्वीकार नहीं करते या समझ नहीं पाते तो बच्चे नाराज हो जाते हैं और आपको अपना दुश्मन मान लेते हैं।

इसके लिए जरूरी है कि आप उनके शौक और पसंद-नापसंद को समझें और उनका समर्थन करें।

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#3

दबाव महसूस करना

किशोरावस्था बहुत दबाव भरा समय होता है, जहां बच्चे स्कूल, दोस्तों और परिवार की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं।

अगर वे इस दबाव को अच्छी तरह संभाल नहीं पाते तो उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ सकती है और वे आपसे दूर हो सकते हैं।

इसके लिए जरूरी है कि आप उनके साथ खुलकर बात करें, उनकी समस्याओं को समझें और उन्हें सही दिशा-निर्देश दें, ताकि वे इस दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

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#4

गलतफहमियां होना

कई बार माता-पिता और बच्चों के बीच गलतफहमियां हो जाती हैं, जिससे संबंध खराब हो सकते हैं।

बच्चे अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पाते या माता-पिता उनके नजरिए को समझ नहीं पाते, जिससे टकराव बढ़ता है।

इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष खुलकर बात करें, एक-दूसरे की बात सुनें और समझने की कोशिश करें। गलतफहमियों को दूर करने के लिए समय निकालकर बातचीत करना बहुत अहम है।

#5

बदलाव स्वीकार करना

किशोरावस्था में बच्चे बहुत बदलावों से गुजरते हैं, जैसे शरीर में बदलाव और मानसिक बदलाव आदि।

अगर माता-पिता इन बदलावों को स्वीकार नहीं करते या उन्हें नजरअंदाज करते हैं तो बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और आपको दोष देने लगते हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे के साथ धैर्य रखें, उसके बदलावों को समझें और उसे समर्थन दें, ताकि वह सुरक्षित महसूस कर सके।

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