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क्या है लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस बीमारी? जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज
लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस के बारे में जानकारी

क्या है लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस बीमारी? जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज

लेखन सयाली
Jun 27, 2026
05:55 pm

क्या है खबर?

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पीठ के निचले हिस्से की हड्डियां एक-दूसरे के ऊपर खिसक जाती हैं। इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है और कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति के कारण पीठ में दर्द, कमजोरी और असुविधा हो सकती है। आइए आज हम आपको इस स्थिति से जुड़ी कुछ अहम बातें बताते हैं, ताकि समय रहते इसका सही इलाज किया जा सके।

कारण

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस के कारण

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें उम्र बढ़ना, चोट लगना, परिवार में इस समस्या का इतिहास और ज्यादा शारीरिक मेहनत शामिल हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ डिस्क कमजोर हो जाती हैं और इससे यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। चोट लगने से भी रीढ़ की हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जो इस स्थिति का कारण बन सकता है। परिवार में पहले से इस समस्या का होना भी एक अहम कारण हो सकता है।

लक्षण

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस के लक्षण

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस के लक्षणों में पीठ के निचले हिस्से में दर्द, कमजोरी, सुन्नपन और जलन शामिल हैं। यह दर्द बैठने, खड़े होने या चलते समय बढ़ सकता है। इसके अलावा पैरों में कमजोरी या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है। कभी-कभी जलन भी महसूस हो सकती है, खासकर जब आप लंबे समय तक बैठते हैं या खड़े रहते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

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जांच

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस का निदान

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच, एक्स-रे या MRI स्कैन कर सकते हैं। इन जांचों से पता चलता है कि क्या आपकी रीढ़ की हड्डियां सही जगह पर हैं या नहीं। इसके अलावा डॉक्टर आपकी सेहत का इतिहास भी लेते हैं, ताकि अन्य संभावित कारणों को खारिज किया जा सके। सही निदान के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, ताकि समय रहते उचित इलाज किया जा सके और स्थिति में सुधार हो सके।

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इलाज

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस का इलाज

लंबर स्पोंडिलोलिस्थेसिस का इलाज दर्द कम करने वाली दवाइयों, फिजियोथेरेपी और व्यायाम के माध्यम से किया जा सकता है। गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत होती है। फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है और दर्द कम होता है। नियमित व्यायाम से रीढ़ की हड्डियों पर दबाव कम होता है। सर्जरी तब जरूरी होती है जब अन्य उपचार असरदार न हों या स्थिति गंभीर हो रही हो। सही समय पर इलाज कराने से स्थिति में सुधार होता है।

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