मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है जापान की 'फारेस्ट बाथिंग' तकनीक, इसके बारे में जानें
क्या है खबर?
फारेस्ट बाथिंग जापान में शुरू किया गया एक अभ्यास है, जिसे 'शिनरिन-योका' भी कहा जाता है। यह अभ्यास प्राकृतिक माहौल में समय बिताने पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। फारेस्ट बाथिंग में पेड़ों के पास जाकर, उनकी खुशबू को महसूस करके और प्राकृतिक ध्वनियों को सुनकर मन को शांत किया जाता है। आइए आज हम आपको फारेस्ट बाथिंग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य बताते हैं।
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फारेस्ट बाथिंग के फायदे
फारेस्ट बाथिंग के कई शारीरिक और मानसिक लाभ हैं। प्राकृतिक माहौल में समय बिताने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और सोचने की क्षमता बढ़ती है।
इसके अलावा यह अभ्यास शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को भी मजबूत करता है, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है। फारेस्ट बाथिंग से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
यह अभ्यास मानसिक थकान को दूर करके ताजगी का अनुभव कराता है।
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कैसे करें फारेस्ट बाथिंग?
फारेस्ट बाथिंग करने के लिए सबसे पहले किसी भी जंगल या पार्क में जाएं, जहां पेड़-पौधे हों। वहां धीरे-धीरे चलें, गहरी सांस लें और अपने चारों ओर की ध्वनियों पर ध्यान दें।
पेड़ों के पास जाकर उनकी खुशबू को महसूस करें और प्राकृतिक माहौल का पूरा आनंद लें। मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें, ताकि आपका ध्यान पूरी तरह से प्रकृति पर केंद्रित हो सके।
इस तरह आप फारेस्ट बाथिंग का पूरा लाभ उठा सकते हैं।
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जापान में फारेस्ट बाथिंग की शुरुआत
जापान में फारेस्ट बाथिंग की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। तब से यह अभ्यास वहां के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो चुका है।
जापान सरकार ने भी इसे स्वास्थ्य प्रोत्साहन कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया है, जिससे लोग मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें। फारेस्ट बाथिंग को जापान में इतना महत्व दिया जाता है कि यहां के अस्पतालों में भी मरीजों को तेजी से ठीक करने के लिए इसे अपनाया जाता है।
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फारेस्ट बाथिंग के लिए कौन-से कपड़े पहनें?
फारेस्ट बाथिंग के दौरान आरामदायक कपड़े पहनना जरूरी है, ताकि आप आसानी से चल सकें और प्राकृतिक माहौल का पूरा आनंद ले सकें। सूती या हल्के कपड़े सबसे अच्छे होते हैं, क्योंकि ये त्वचा को हवा लगने देते हैं और पसीना सोख लेते हैं।
इसके अलावा ढीले-ढाले कपड़े पहनें, ताकि चलने में कोई दिक्कत न हो। जूते भी आरामदायक होने चाहिए, ताकि लंबे समय तक चलने में कोई परेशानी न हो।
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फारेस्ट बाथिंग का वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो फारेस्ट बाथिंग का महत्व बहुत ज्यादा है। कई शोध बताते हैं कि प्राकृतिक माहौल में समय बिताने से शरीर में तनाव के हार्मोन की मात्रा कम होती है और खुशियों वाले हार्मोन, जैसे सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ती है।
इससे व्यक्ति खुश रहता है और उसकी मानसिक स्थिति बेहतर होती है। इसके अलावा पेड़ों द्वारा उत्सर्जित सुगंधित गुण भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।