सांस्कृतिक त्योहारों का अनुभव करने के लिए इन 5 जगहों पर जाएं
क्या है खबर?
भारत की समृद्ध संस्कृति और धरोहर को दर्शाने वाले सांस्कृतिक त्योहार हर साल मनाए जाते हैं। इन त्योहारों में देशभर से लोग आते हैं और पारंपरिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। इन त्योहारों में भारत की विविधता, परंपरा और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। आइए आज हम आपको 5 ऐसे सांस्कृतिक त्योहारों के बारे में बताते हैं, जहां आपको एक बार जरूर जाना चाहिए।
#1
गोकर्ण रथोत्सव
कर्नाटक के गोकर्ण में हर साल गोकर्ण रथोत्सव होता है। इस त्योहार में भगवान ओमकारेश्वर और महाबलेश्वर की रथ यात्रा होती है। इस रथ यात्रा में हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं और भगवान की झलक पाने के लिए उत्सुक रहते हैं। रथ यात्रा के बाद मंदिर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाता है, जिसमें कई मशहूर भजन गायक भजन गाते हैं।
#2
ओणम
केरलम में मनाया जाने वाला ओणम का त्योहार 10 दिनों तक चलता है। यह त्योहार राजा महाबली के आगमन का प्रतीक है। राजा महाबली अपने राज्य के सभी लोगों से मिलने के लिए हर साल अपने राज्य से बाहर आते हैं। इस त्योहार पर राज्य भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इस त्योहार पर पारंपरिक नाच-गाना भी किया जाता है, जो इस त्योहार की खासियत है।
#3
बैसाखी
सिखों के लिए बैसाखी बहुत ही खास है, क्योंकि यह उनके नए साल और फसल के त्योहार का प्रतीक है। यह त्योहार हर साल अप्रैल में मनाया जाता है। इस त्योहार पर लोग गुरुद्वारे जाकर प्रार्थना करते हैं और लंगर का आनंद लेते हैं। इसके अतिरिक्त इस त्योहार पर पारंपरिक नाच-गाना भी किया जाता है, जो इस त्योहार की खासियत है। यह त्योहार 13 अप्रैल से 14 अप्रैल तक मनाया जाएगा।
#4
डांडिया
गुजरात में मनाया जाने वाला डांडिया त्योहार 9 दिनों तक चलता है, जो देवी दुर्गा को समर्पित है। इस दौरान गुजरात में रास गरबा का आयोजन होता है। इस त्योहार में भाग लेने के लिए देशभर से लोग गुजरात आते हैं। इस त्योहार पर लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर रास गरबा करते हैं और देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए प्रार्थना करते हैं। इस बार यह त्योहार 22 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।
#5
रथ यात्रा
ओडिशा में मनाई जाने वाली रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा है, जो हर साल जुलाई के महीने में होती है। इस बार यह त्योहार 12 जुलाई को है। इस त्योहार पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके रथ पर सवारी करवाई जाती है। इस दौरान सड़कों पर कई झांकियां सजाई जाती हैं। इस त्योहार को देखने के लिए देशभर से लोग उड़ीसा आते हैं।