चावल की ये स्वदेशी किस्में आपको जरूर आएंगी पसंद, जानिए क्या हैं इनकी खास बातें
क्या है खबर?
चावल भारतीय खान-पान का एक अहम हिस्सा हैं। ये हमारे रोजमर्रा के खाने में कई तरीकों से शामिल होते हैं, जैसे पुलाव, बिरयानी और खिचड़ी आदि। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में कई देसी चावल की किस्में होती हैं, जो न केवल स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होती हैं? इस लेख में हम आपको ऐसी देसी चावल की किस्मों के बारे में बताएंगे, जो आपके खाने का स्वाद बढ़ा सकती हैं।
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जोहा चावल
ब्रह्मपुत्र घाटी में उगाया जाने वाला असम का जोहा चावल इन दिनों काफी लोगों का पसंदीदा बन गया है। 'जोहा' एक असमिया शब्द है, जिसका मतलब ही 'सुगंधित' होता है। इससे ही आप जान गए होंगे कि यह चावल अपनी खुशबु की वजह से मशहूर है। इसके दाने छोटे होते हैं और इसे आम तौर पर पारंपरिक असमिया व्यंजन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे स्थानीय लोग मी जाहा नाम से भी जानते हैं।
#2
बासमती चावल
हम में से ज्यादातर लोग रोजमर्रा के खान-पान में बासमती चावल का इस्तेमाल करते हैं। यह चावल एक शाही और लंबे दाने वाला सुगंधित विकल्प है। इसे पकाने के बाद भी इसके लंबे दाने मुलायम, खिले-खिले और फूले-फूले रहते हैं। इसे लोग पुलाव, बिरयानी और खीर आदि बनाने के लिए ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। यह ऐसा चावल है, जिसका इस्तेमाल लोगों के घरों से लेकर रेस्टोरेंट तक और यहां तक कि मंदिरों में भी होता है।
#3
चक-हाओ चावल
चक-हाओ मणिपुर में उगाया जाने वाला प्रसिद्ध चावल है, जिसका रंग काला होता है। यही कारण है कि इसे कई लोग काले चावल नाम से भी जानते हैं। इसे 'सुगंधित चावल' भी कहा जाता है और इसे इसके औषधीय गुणों व गहरे रंग के लिए पसंद किया जाता है। इसे मणिपुर का GI टैग भी प्राप्त है, जो इसे और भी खास बना देता है। काला होने के बावजूद पकने के बाद यह चावल बैंगनी रंग का हो जाता है।
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पलक्कडन मट्टा चावल
पलक्कडन मट्टा चावल भी एक खास किस्म का चावल है, जिसे लाल चावल भी कहा जाता है। यह चावल केरलम में उगाया जाता है और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका रंग प्राकृतिक रूप से लाल होता है और सुगंध भी अच्छी होती है। यह अपनी उच्च पोषण क्षमता और GI टैग होने के कारण काफी पसंद किया जाता है। इसे लोग अक्सर केरलम की पारंपरिक सब्जियों के साथ खाना पसंद करते हैं।