जन्माष्टमी पर उपवास रखने वालों के लिए सेहतमंद विकल्प हैं ये आटे
क्या है खबर?
जन्माष्टमी के मौके पर कई लोग उपवास रखते हैं और इस दौरान वे ऐसी चीजें खाते हैं, जो बिना नमक के बनाई जाती हैं। हालांकि, उपवास के दौरान खाने के लिए आटे की कई ऐसी रेसिपी हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी हैं। आइए आज हम आपको ऐसे आटे के बारे में बताते हैं, जिनसे आप अपने उपवास को और भी मजेदार बना सकते हैं और इनसे कई तरह के व्यंजन बनाकर खा सकते हैं।
#1
कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा एक पौष्टिक विकल्प है, जो उपवास के दौरान खाया जाता है। यह फाइबर, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होता है।
कुट्टू का आटा आलू के साथ मिलाकर टिक्की, पूड़ी या पकोड़े बनाकर खाया जा सकता है।
इसके अलावा इससे आप कुट्टू की पूरी भी बना सकते हैं, जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है। यह आटा पाचन को सुधारने में मदद करता है और ऊर्जा प्रदान करता है।
#2
सिंघाड़े का आटा
सिंघाड़े का आटा भी उपवास के दौरान खाया जाने वाला एक अहम हिस्सा है। यह आटा बिना ग्लूटेन का होता है और इसमें कम कैलोरी होती हैं। इससे आप सिंघाड़े की पूरी, हलवा या टिक्की बना सकते हैं।
सिंघाड़े का आटा पाचन को सुधारने में मदद करता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है, जो गर्मियों में बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद पोषक तत्व ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।
#3
राजगिरा का आटा
राजगिरा का आटा भी उपवास के लिए एक अच्छा विकल्प है। यह आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है। राजगिरा के आटे से आप लड्डू, पराठे और पूड़ी आदि बना सकते हैं।
यह आटा ग्लूटेन-रहित होता है, जो इसे उन लोगों के लिए उपयुक्त बनाता है, जिन्हें ग्लूटेन से समस्या होती है। इसके अतिरिक्त यह पाचन क्रिया को ठीक रखने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
#4
रागी का आटा
रागी का आटा भी उपवास के दौरान खाने के लिए बढ़िया विकल्प हो सकता है।
इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो सेहत को कई फायदे दे सकते हैं।
रागी का आटा ग्लूटेन मुक्त होता है, इसलिए यह लस से परहेज करने वालों के लिए उपयुक्त है। रागी के आटे से विभिन्न प्रकार के पौष्टिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं।