महिलाओं में PCOS के हो सकते हैं ये 5 संकेत, न करें नजरअंदाज
क्या है खबर?
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक ऐसी स्थिति है, जिससे किसी भी उम्र की महिलाओं को प्रभावित किया जा सकता है। यह समस्या हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है और इससे शरीर में पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप अंडाशय में कई छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं। आइए आज हम आपको PCOS के कुछ शारीरिक संकेतों के बारे में बताते हैं, जो महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करने चाहिए।
#1
अनियमित या बंद पीरियड्स आना
PCOS का सबसे आम शारीरिक संकेत है मासिक धर्म का अनियमित या अचानक बंद होना। इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में मासिक धर्म का अंतराल 2 से 3 महीने तक हो सकता है, जबकि सामान्य महिलाओं में हर महीने मासिक धर्म होता है। कभी-कभी PCOS से ग्रस्त महिलाओं में 6 महीने के बाद भी मासिक धर्म नहीं आता है। यह समस्या हार्मोनल असंतुलन के बड़ा कारण होती है।
#2
वजन का बढ़ना
PCOS से ग्रस्त महिलाओं का वजन बढ़ना भी एक आम संकेत है। इस समस्या के कारण शरीर में पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे चर्बी का जमाव होता है। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं का वजन बढ़ने लगता है। यह समस्या महिलाओं के लिए स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसे ठीक करने के लिए संतुलित डाइट करें, रोज़ाना 30-40 मिनट एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस कंट्रोल करें।
#3
मुंहासे होना
PCOS का एक और शारीरिक संकेत है मुंहासे होना। इससे प्रभावित महिलाओं के चेहरे, ठुड्डी और गालों पर बड़े और दर्दनाक मुंहासे हो सकते हैं। इसके अलावा, सीने, पीठ और कंधों पर भी मुंहासे हो सकते हैं। यह समस्या शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। इसे ठीक करने के लिए ऑयल-फ्री स्किनकेयर अपनाएं ज्यादा शुगर और जंक फूड से बचें नियमित एक्सरसाइज करें जरूरत पड़े तो डॉक्टर से दवा लें
#4
अनिद्रा की समस्या होना
PCOS एक ऐसी समस्या है, जो महिलाओं की नींद को प्रभावित कर सकती है। इससे ग्रस्त महिलाओं को सोने में दिक्कत हो सकती है और वे सोते समय बार-बार जाग सकती हैं। यह समस्या शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है, जिससे नींद पर भी प्रभाव पड़ता है। इस ठीक करने के लिए आप संतुलित डाइट करें, रोज़ाना 30-40 मिनट एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस कंट्रोल करें।
#5
अनचाही गर्भावस्था होना
PCOS से ग्रस्त महिलाओं में अनचाही गर्भावस्था होने की संभावना ज्यादा होती है। इस समस्या में गर्भावस्था के दौरान गर्भपात होने की संभावना भी अधिक होती है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान जच्चा और शिशु की मौत होने का खतरा भी ज्यादा होता है। समय से पहले प्रसव होने का खतरा भी अधिक होता है, जो महिलाओं के लिए चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, यह दवाइयों से सही हो जाता है।