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कॉस्मिक रेडिएशन से पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट को हो रहा है जानलेवा कैंसर का खतरा- अध्ययन
कॉस्मिक रेडिएशन से जानलेवा कैंसर का खतरा

कॉस्मिक रेडिएशन से पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट को हो रहा है जानलेवा कैंसर का खतरा- अध्ययन

लेखन सयाली
Aug 18, 2026
05:57 pm

क्या है खबर?

पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट रोजाना फ्लाइट में काम करते समय आसमान की ऊंचाइयों पर सफर करते हैं। इस दौरान वे तेज धूप के संपर्क में आते हैं और अल्ट्रा वॉयलेंट किरणों के नजदीक रहते हैं। अब खुलासा हुआ है कि फ्लाइट में रहते हुए वे अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक रेडिएशन की चपेट में भी आ जाते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, ये रेडिएशन जानलेवा कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन

किसने किया गया खास अध्ययन?

इस अध्ययन में पाया गया है कि पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट अंतरिक्ष से आने वाले कॉस्मिक रेडिएशन के संपर्क में दूसरों की तुलना में ज्यादा आते हैं।

इसके चलते उन्हें इससे जुड़े कैंसर से जान गंवाने का खतरा भी ज्यादा होता है। यह अध्ययन हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है और इसे 'JAMA इटर्नल मेडिसिन' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रक्रिया

किसको है इन रेडिएशन से ज्यादा खतरा?

शोधकर्ताओं ने उन लोगों के मृत्यु सर्टिफिकेट की तुलना की, जिन्होंने रेडिएशन के संपर्क में आने वाले अलग-अलग प्रोफेशन में काम किया।

विश्लेषण से पता चला कि रेडिएशन से जुड़े कैंसर का खतरा पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट के लिए उन लोगों से ज्यादा था, जो सीधे न्यूक्लियर पदार्थों के साथ काम करते हैं।

मुख्य लेखक विशाल पटेल ने कहा, "यह जानना मुश्किल है कि इस क्षेत्र में काम करने वालों में रेडिएशन के कारण कैंसर से ज्यादा मौतें होती हैं।"

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नतीजे

क्या हुआ खुलासा?

शोधकर्ताओं ने 2 तरह के पेशे चुनें- न्यूक्लियर टेक्नोलॉजिस्ट और ग्राउंड एयरक्रू सदस्य। उन्होंने 2020-2024 के बीच 503 तरह के कामों में हुई 1.27 करोड़ मौतों का विश्लेषण किया।

इनमें 14,000 पायलट और 7,000 फ्लाइट अटेंडेंट शामिल थे। रेडिएशन से जुड़े कैंसर से होने वाली मौतों में पायलट (6.7 प्रतिशत) और अटेंडेंट (6.9 प्रतिशत) का हिस्सा सबसे ज्यादा था।

ज्यादा अक्षांशों पर रेडिएशन का स्तर ज्यादा होता है, क्योंकि वहां पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कणों को कम विक्षेपित करता है।

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बचाव

क्या है बचाव के उपाय?

अध्ययन में इस मुद्दे से बचाव करने के उपायों पर भी चर्चा की गई थी। उनका दावा है कि विमान को ही सुरक्षित करना इसका समाधान नहीं है।

पटेल ने कहा, "पहला उचित कदम व्यक्तिगत खुराक का अनुमान लगाना होगा, जिसमें चालक दल के सदस्य के पूरे करियर के दौरान विभिन्न नियोक्ताओं के साथ काम करने का रिकॉर्ड शामिल हो।"

अध्ययन के मुताबिक, लगातार हवाई यात्रा करने वालों को भी उतना खतरा नहीं, जितना इन कर्मचारियों को है।

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