14 या 15 जनवरी, कब है मकर संक्रांति? जानिए शुभ मुहूर्त और त्योहार का धार्मिक महत्व
क्या है खबर?
जनवरी शुरू हो गई है और अब साल का पहला पर्व 'मकर संक्रांति' भी आने वाला है। यह हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सूर्य की उत्तरायण यात्रा का जश्न मनाता है। यह सर्दियों के खत्म होने और शीतकालीन फसलों की कटाई का प्रतीक है। कई राज्यों में इस पर्व को खिचड़ी भी कहा जाता है। इस साल लोग इसकी तिथि को लेकर असमंजस में हैं। आइए मकर संक्रांति की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व जानते हैं।
तिथि
मकर संक्रांति की तिथि और पूजन मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी यानि बुधवार को मनाया जाएगा। आमतौर पर यह पर्व हर साल इसी तिथि को पड़ता है। हालांकि, ग्रहों की स्थिति के चलते कुछ लोग सोच रहे थे कि इसे 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दृक पंचांग के मुताबिक, इस दिन पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से शुरू होगा। वहीं, पर्व का महापुण्य काल दोपहर 03:13 से शुरू हो कर शाम 04:58 बजे तक रहेगा।
महत्व
क्या है इस पर्व का धार्मिक महत्व?
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तर की ओर बढ़ना शुरू करता है और दिन लंबे होने लगते हैं। यह त्योहार खुशहाली, आभार और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, तिल-गुड़ का दान और पतंगबाजी करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इन कार्यों से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति से सर्दियों अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है, जिससे फसल कटाई शुरू हो जाती है।
कथा
क्या है मकर संक्रांति मनाने की पौराणिक कहानी?
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं। ऐसे में यह पर्व पिता और पुत्र के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। कुछ कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का संहार करके उनके सिरों को मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। कहते हैं इस दिन गंगा नदी भागीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं।
खिचड़ी
मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी?
मकर संक्रांति के दिन सभी घरों में खिचड़ी बनती है। कहते हैं इस दिन उड़द दाल और चावल कि खिचड़ी खाने और दान करने से शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं और दोष दूर करते हैं। खिचड़ी में चावल, दाल, हल्दी, नमक और सब्जियां डाली जाती हैं, जिनका संबंध अलग-अलग ग्रहों से होता है। इसीलिए, इसे खाने से ग्रहों के शुभ प्रभाव मिलते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ठंड में खिचड़ी खाने से गर्मी भी मिलती है।
पतंगबाजी
किसने शुरू की थी मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा?
मकर संक्रांति को 'पतंग पर्व' नाम से भी जाना जाता है। इसका कारण साफ है, क्योंकि इस दिन आसमान में हजारों पतंग उड़ती हुई नजर आती हैं। तमिल में लिखी गई तन्नाना रामायण में कहा गया है कि इस पर्व पर पतंग उड़ाने की शुरुआत भगवान राम ने की थी। उनके द्वारा उड़ाई गई पतंग इंद्रलोक तक जा पहुंची थी। कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने से लोग एक दूसरे को प्रेम का संकेत भेज सकते हैं।