भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े 5 अनजाने तथ्य, जो उसे बनाते हैं सबसे खास
क्या है खबर?
भारतीय शास्त्रीय संगीत एक समृद्ध और प्राचीन कला है, जो एक परंपरा बन चुकी है। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाता है, बल्कि आत्मा को भी शांति प्रदान करता है। इस संगीत की गहराई और विविधता इसे अनोखा बनाती है। आइए आज हम आपको भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े कुछ अनजाने तथ्य बताते हैं। इनके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे और भारतीय शास्त्रीय संगीत का और सम्मान करने लगेंगे।
#1
समय पर निर्भर करती हैं राग
भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों का चयन समय के अनुसार किया जाता है। हर राग का एक विशेष समय होता है, जिसमें उसे गाना या बजाना सबसे प्रभावी होता है। उदाहरण के लिए राग भैरव सुबह सूर्योदय के समय गाया जाता है, जबकि राग दीपक शाम के समय प्रस्तुत किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सही समय पर राग प्रस्तुत करने से उसकी सुंदरता और प्रभाव बढ़ जाता है।
#2
रागों की संख्या है बहुत ज्यादा
शास्त्रीय संगीत में रागों की संख्या ज्यादा है, जो हजारों में भी हो सकती है। इन्हें 2 मुख्य समूहों में बांटा जाता है, जो ध्रुपद और ख्याल हैं। ध्रुपद गाने की शैली धीमी होती है और इसमें कहानी या भक्ति गीत गाए जाते हैं। ख्याल राग तेज और लयबद्ध होते हैं। इन्हें भी 2 समूहों में बाटा जाता है, यानि छोटा और बड़ा ख्याल। इन रागों की अनेकों उपश्रेणियां भी होती हैं, जिनमें अलग-अलग स्वर और लय होते हैं।
#3
शामिल होते हैं कई वाद्ययंत्र
भारतीय शास्त्रीय संगीत वाद्ययंत्रों की अनोखी दुनिया से भरा हुआ है। सितार, तबला, सारंगी और बांसुरी जैसे वाद्ययंत्र इस संगीत शैली का हिस्सा रहते हैं। इनमें से कुछ वाद्ययंत्र तो इतने जटिल होते हैं कि उन्हें बजाने के लिए सालों की साधना की आवश्यकता होती है। इसके अलावा हर वाद्ययंत्र की अपनी एक खासियत होती है, जो उसे अन्य संगीत शैलियों से अलग बनाती है। इन वाद्ययंत्रों की धुनें सुनकर आत्मा को शांति मिलती है।
#4
मौसम और भाव के हिसाब से भी होते हैं राग
भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों का मौसम भी महत्वपूर्ण होता है और काफी मायने रखता है। राग मल्हार जैसे कुछ राग मानसून के दौरान गाए जाते हैं, क्योंकि वे बारिश की बूंदों की तरह महसूस होते हैं। इसके अलावा हर राग का एक विशेष भाव होता है, जो उसे अलग बनाता है। कुछ राग इतने खास होते हैं कि उन्हें गाने से बारिश तक हो सकती है और दिये तक जल सकते हैं।
#5
गायकी और वादन की खास तकनीकें होती हैं शामिल
भारतीय शास्त्रीय संगीत की गायकी और वादन की कला बहुत ही खास होती हैं। गायकों द्वारा अलाप, तान और मींड जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जो संगीत को जीवंत बनाती हैं। वहीं वादकों द्वारा झपताल और द्रुतताल जैसी तालों का उपयोग किया जाता है, जो संगीत को लयबद्ध बनाते हैं। इस प्रकार भारतीय शास्त्रीय संगीत न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान है, बल्कि इसमें कई जटिलताएं भी शामिल होती हैं।