रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से जुड़े ये 5 भ्रम, जानिए इनकी सच्चाई
क्या है खबर?
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उसे बीमारियों और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। हालांकि, आजकल बाजार में ऐसी कई दवाएं और सप्लीमेंट्स मौजूद हैं, जो इसे बढ़ावा देने का दावा करती हैं, लेकिन इनके बारे में सच्चाई जानना जरूरी है। आइए आज हम आपको रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने से जुड़े ऐसे भ्रमों और उनकी सच्चाई के बारे में बताते हैं, जिनके बारे में जानकर आप इनका सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएंगे।
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भ्रम- रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने वाले सप्लीमेंट्स हमेशा सुरक्षित होते हैं
यह सबसे आम भ्रमों में से एक है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने वाले सप्लीमेंट्स हमेशा सुरक्षित होते हैं। सचाई यह है कि सभी सप्लीमेंट्स हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं। कुछ सप्लीमेंट्स में ज्यादा मात्रा में तत्व हो सकते हैं, जो सेहत पर गलत असर डाल सकते हैं। इसके अलावा कुछ सप्लीमेंट्स के साथ अन्य दवाओं के सेवन से नुकसान भी हो सकता है। इसलिए किसी भी सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।
#2
भ्रम- विटामिन-C से भरपूर सप्लीमेंट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं
कई लोग मानते हैं कि विटामिन-C से भरपूर सप्लीमेंट्स लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जबकि ऐसा नहीं है। विटामिन-C एक जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन यह सीधे तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को नहीं बढ़ाता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद विटामिन-C की कमी पूरी हो सकती है। इसके लिए संतरे, कीवी और हरी सब्जियों का सेवन करना बेहतर है। विटामिन-C की कमी के लक्षणों को पहचानना भी महत्वपूर्ण है ताकि समय पर इसका समाधान किया जा सके।
#3
भ्रम- प्रोबायोटिक्स से भरपूर सप्लीमेंट्स हमेशा फायदेमंद होते हैं
यह भी एक भ्रम है कि प्रोबायोटिक्स से भरपूर सप्लीमेंट्स हमेशा फायदेमंद होते हैं। प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन इनका ज्यादा सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे पेट में गैस्ट्रिक समस्याएं हो सकती हैं और पाचन क्रिया में गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए प्रोबायोटिक्स का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बाद ही इन्हें अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
#4
भ्रम- सभी प्रकार की शारीरिक गतिविधियां रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं
शारीरिक गतिविधियां निश्चित रूप से शरीर के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर प्रकार की शारीरिक गतिविधि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए। कुछ गतिविधियां जैसे कि बहुत ज्यादा दौड़ना या भारी वजन उठाना शरीर पर ज्यादा दबाव डाल सकती हैं। इसलिए संतुलित और नियमित व्यायाम ही आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि आप अपने शरीर की क्षमता के अनुसार ही व्यायाम करें।