LOADING...
कश्मीर की अखरोट की लकड़ी की नक्काशी वाली पारंपरिक कला से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कश्मीर की अखरोट की लकड़ी की नक्काशी वाली कला

कश्मीर की अखरोट की लकड़ी की नक्काशी वाली पारंपरिक कला से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

लेखन सयाली
Jan 05, 2026
06:59 pm

क्या है खबर?

कश्मीर में अखरोट की लकड़ी पर शानदार नक्काशी की जाती है। यह प्राचीन कला यहां केवल रोजगार का जरिया नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है। इसमें कलाकार हाथों से अखरोट की लकड़ी पर सुंदर डिजाइन वाली नक्काशी करते हैं, जो बेहद खूबसूरत होती है। इस लेख में हम आपको इस कला के इतिहास, प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में बताएंगे। इससे आपको इस अनोखी कला के बारे में विस्तार से जानने में मदद मिलेगी।

#1

क्या है इस अनोखी कला का इतिहास?

इस कला का इतिहास बहुत पुराना है और यह कश्मीर की संस्कृति का अहम हिस्सा है। यह कला मुख्य रूप से कश्मीरी मुस्लिम कारीगरों द्वारा विकसित की गई थी। पहले इसका उपयोग घरों की सजावट के लिए किया जाता था। हालांकि, धीरे-धीरे इसका उपयोग कपड़े, फर्नीचर और अन्य सामान बनाने के लिए भी किया जाने लगा। आजकल यह कला पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है और कई लोग इसे अपने घरों में शामिल करना पसंद करते हैं।

#2

जानिए इस कला की प्रक्रिया

इस कला को करने के लिए सबसे पहले अखरोट के पेड़ की मजबूत लकड़ी का चयन किया जाता है। इसके बाद कारीगर लकड़ी को साफ करते हैं और नक्काशी करना शुरू करते हैं। वे लकड़ी पर फूल, पत्तियां और ज्यामितीय आकार आदि जैसे डिजाइन उकेरते हैं। इन डिजाइनों को उकेरने के लिए नुकीले औजारों का उपयोग किया जाता है। इसके बाद तैयार लकड़ी को चमकाने के लिए पॉलिश किया जाता है, ताकि वह अधिक आकर्षक दिख सके।

Advertisement

#3

इस कला से सजने वाली वस्तुएं

कश्मीर की इस कला का उपयोग कई प्रकार के सामान बनाने के लिए किया जाता है। इसके जरिए सुंदर बक्से, अलमारी और मेज-कुर्सी आदि बनाए जाते हैं। इसके अलावा यह कला धार्मिक वस्तुओं जैसे कुरान होल्डर्स और ताबीज आदि बनाने के भी काम आती है। इसके अलावा इस कला का उपयोग गहनों के डिब्बे, ट्रे और फोटो फ्रेम आदि बनाने के लिए भी किया जाता है। यह कला न केवल सजावट, बल्कि रोजमर्रा की वस्तुओं में भी शामिल होती है।

Advertisement

#4

दून कुल का सांस्कृतिक महत्व

यह केवल एक कला नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। यह कला स्थानीय लोगों की जीवनशैली और परंपराओं को दर्शाती है। हर घर में इस कला की कोई न कोई वस्तु जरूर नजर आ जाती है, जो उसकी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखती है। ऐसे में यह कला न केवल आर्थिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है। यह कश्मीर के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को जीवित रखती है।

Advertisement